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Assam: बाल विवाह के खिलाफ कार्रवाई के बाद दस्तावेजों के लिए दर-दर भटक रहीं पत्नियां, लगाया ये आरोप

Mon, 06 Feb 2023 05:12 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी

सार

कई प्रभावित परिवारों ने यह भी दावा किया कि पुलिस ने मामले दर्ज करने के लिए महिलाओं की गलत जन्म तिथि वाले पहचान दस्तावेजों का हवाला दिया था। बाल विवाह के खिलाफ चार दिन पहले कार्रवाई शुरू की गई थी।
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मोरीगांव के सरकारी आश्रय गृह में बाल विवाह में कथित रूप से शामिल महिलाएं - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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असम की हिमंत बिस्व सरमा सरकार ने हाल ही में बाल विवाह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। इसके बाद से बड़ी संख्या में युवा सलाखों के पीछे हैं। वहीं उनकी पत्नियां दस्तावेज ढूंढने के लिए दर-दर भटक रही हैं, ताकि वह यह साबित कर सकें कि शादी के समय उनकी उम्र कम नहीं थी। 

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कई प्रभावित परिवारों ने यह भी दावा किया कि पुलिस ने मामले दर्ज करने के लिए महिलाओं की गलत जन्म तिथि वाले पहचान दस्तावेजों का हवाला दिया था। बाल विवाह के खिलाफ चार दिन पहले कार्रवाई शुरू की गई। इसके बाद से अब तक राज्यभर में कुल 2,241 लोग गिरफ्तार किए गए हैं। वहीं, 4,074 प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं। 

मोरीगांव जिले के भूरागांव निवासी एक बुजुर्ग ने दावा किया कि बाल विवाह के अधिकांश मामले स्थानीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा एकत्र किए गए आंकड़ों के आधार पर दर्ज किए गए थे, जो सरकारी योजनाओं का कवरेज सुनिश्चित करने के लिए गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और छोटे बच्चों वाले परिवारों पर नजर रखते हैं।
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उन्होंने बताया, ये स्वास्थ्य कार्यकर्ता आधार कार्ड की जानकारी का इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि यह ग्रामीणों के पास मौजूद नवीनतम दस्तावेज है। हालांकि, आधार कार्ड में जन्मतिथि से संबंधित त्रुटियां देखी गई हैं, लेकिन किसी ने भी गंभीरता से ध्यान नहीं दिया।  

एक अन्य ग्रामीण जमालुद्दीन ने आरोप लगाया कि आधार कार्ड में उनकी बहू की जन्म तिथि के आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया है। उनका बेटा राजीबुल हुसैन पुलिस हिरासत में है। 

जमालुद्दीन ने कहा, उसने गर्भावस्था के दौरान आशा कार्यकर्ता को आधार विवरण प्रदान किया गया था। हम नहीं जानते थे कि अधिकारियों द्वारा जन्म के वर्ष में गलती हमें इतनी महंगी पड़ेगी। उनकी बहू को अब मोरीगांव शहर में अपने पैतृक घर जाना पड़ा है, ताकि सही जन्म तिथि के साथ पुराने पहचान दस्तावेज प्राप्त कर सकें। प्रभावित लोगों की सुरक्षा के लिए उनके नाम बदले गए हैं।

इस मामले में सलाखों के पीछे बंद उसी गांव के एक अन्य युवक राशिदुल हुसैन के पिता ने भी कहा कि सरकारी पहचान पत्र में 'त्रुटि' के कारण उनके बेटे की गिरफ्तारी हुई। 
स्थानीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को सौंपे गए पहचान दस्तावेजों के अनुसार जन्मतिथि के कारण रोनिता बिस्वास और सिम्पी रॉय मंडल भी अपने पतियों की गिरफ्तारी के बाद मोरीगांव के सरकारी आश्रय में हैं।

आश्रय गृह के एक कर्मचारी ने बताया, सरकारी आश्रयों में लाई गई अधिकांश महिलाओं की पहचान स्थानीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत रिकॉर्ड के अनुसार की गई है, और गर्भवती या छोटे बच्चों के साथ उन महिलाओं को प्राथमिकता दी गई है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनकी देखभाल की जाए। 

उन्होंने कहा, इन आश्रय ग्रहों में सीमित संसाधन हैं। हम यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि अकेली और जरूरतमंद महिलाओं को रहने के लिए जगह दी जाए, जब तक कि वे उचित वैकल्पिक व्यवस्था नहीं कर लेतीं।

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प्रेमी से शादी न होने पर नाबालिग ने की आत्महत्या
बाल विवाह के खिलाफ राज्य सरकार की कार्रवाई के बीच कछार जिले में एक नाबालिग ने कथित तौर पर इसलिए आत्महत्या कर ली, क्योंकि उसके परिवार ने उसकी शादी उसके प्रेमी से नहीं होने दी।

सरकार की ओर से बाल विवाह के खिलाफ कार्रवाई के बाद बराक घाटी में कम उम्र की लड़कियों की कई शादियां रद्द कर दी गईं। बराक घाटी में हैलीकांडी, कछार और करीमगंज जिले शामिल हैं। बाल विवाह के खिलाफ राज्य में तीन जनवरी को अभियान शुरू किया गया था, तब से सोमवार तक कम से कम 2,441 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। 

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि कछार जिले के धलाई इलाके में नाबालिग (17 वर्षीय) लड़की ने शनिवार को फांसी लगाई, क्योंकि उसके परिवार के लोग उसे अपने प्रेमी से शादी करने की अनुमति नहीं दे रहे थे। 

लड़की के एक रिश्तेदार ने कहा, उसने अपने प्रेमी के साथ भागने की तैयारी की थी, लेकिन परिवार को इसके बारे में पता चल गया और उन्होंने उसे रोक दिया। पड़ोसी गांवों में बाल विवाह के मामलों में करीब 19 गिरफ्तारियां हुई हैं। रविवार शाम तक बराक घाटी में 243, कछार में 80, हैलाकांडी में 82 और करीमगंज में 82 लोगों को गिरफ्तार किया गया। वेडिंग हॉल मालिकों के मालिकों के अनुसार, अभियान शुरू होने के बाद से कई लोगों ने निर्धारित शादियों को रद्द कर दिया है।

करीमगंज के श्रीमंतकनिशैल गांव में ऐसी ही एक शादी रद्द कर दी गई, क्योंकि दुल्हन 18 साल होने से दो महीने दूर थी।  एक वेडिंग हॉल के मालिक ने कहा, 'जब दुल्हन के परिवार ने इस मुद्दे को उठाया, तो दोनों परिवारों ने शादी को तब तक स्थगित करने का फैसला किया जब तक कि लड़की शादी के लिए कानूनी उम्र प्राप्त नहीं कर लेती।

कछार जिले में सोनिया निर्वाचन क्षेत्र के विधायक करीम उद्दीन बरभुइया ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से कई वर्षों से विवाहित लोगों को पुलिस कार्रवाई से छूट देने का आग्रह किया। एक बयान में उन्होंने कहा कि परिवारों को बाधित किया जा रहा है और ऐसे परिवारों के बच्चों का भविष्य दांव पर है। बरभुइया ने मुख्यमंत्री से बाल विवाह के खिलाफ इस अभियान में समाज के गरीब और कमजोर वर्गों को परेशान करना बंद करने का आग्रह किया।

राज्य मंत्रिमंडल ने हाल ही में 14 साल से कम उम्र की लड़कियों से शादी करने वाले पुरुषों के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। मंत्रिमंडल ने निर्णय लिया कि 14-18 वर्ष की आयु वर्ग की लड़कियों की शादी करने वालों के खिलाफ बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत मामले दर्ज किए जाएंगे। अपराधियों को गिरफ्तार किया जाएगा और विवाह को अवैध घोषित किया जाएगा।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) की रिपोर्ट के अनुसार, असम में मातृ और शिशु मृत्यु की उच्च दर है, जिसमें बाल विवाह प्राथमिक कारण है।
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