असम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक बड़े नेता ने वंशवाद को लेकर बड़ा बयान दिया है। भाजपा नेता हेमंत बिस्व सरमा ने वंशवाद को लेकर कहा कि वे नहीं चाहते कि उनका बेटा राजनीति में कदम रखे। वह जितना राजनीति से दूर रहेगा, उतना ही उसके लिए अच्छा रहेगा।
भाजपा नेता हेमंत बिस्व सरमा का बेटा नंदिल इस बार पहली बार मतदान करने को लेकर बेहद उत्साहित दिखा। वहीं भाजपा नेता नहीं चाहते कि उनका बेटा उनके नक्शेकदम पर चले। कॉलेज से ही नेता बनने वाले हेमंत बिस्व सरमा अपने बेटे को लेकर काफी अलग सोच रखते हैं। हेमंत बिस्व सरमा ने कहा कि नांदिल अभी सिर्फ 18 साल का है। उसके लिए यही बेहतर है कि जितना हो सके, वह राजनीति से दूर रहे। उन्होंने आगे कहा, ''मैं नहीं चाहता कि मेरा बेटा इस दुनिया में कदम रखे। मुझे जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, मुझे नहीं लगता कि वह ऐसी चुनौतियों का सामना कर पाएगा।''
बेटे ने कहा, राजनीति में आने मेरी कोई योजना नहीं
भाजपा नेता ने कहा कि उनका बेटा नांदिल अगले कुछ महीनों में एक कानून विश्वविद्यालय में पहुंच जाएगा। वहीं जब नांदिल से राजनीति में आने को लेकर पूछा गया, तो उसने स्पष्ट जवाब दिया कि मेरी राजनीति में आने की कोई योजना नहीं है।
52 वर्षीय हेमंत बिस्व सरमा ने कांग्रेस के साथ अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। वर्ष 2001 से 2015 तक जालुकबारी विधानसभा क्षेत्र में उन्होंने कांग्रेस का दबदबा कायम रखा। 15 साल तक वे इस सीट से विधायक रह चुके हैं। साल 2011 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत में उन्होंने बड़ी भूमिका निभाई थी। इसके बावजूद कांग्रेस से उन्हें तवज्जो नहीं मिली, जो वो चाहते थे।
वर्ष 2016 में असम में पहली बार भाजपा की सरकार बनी। भाजपा की इस कामयाबी के पीछे मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के अलावा हेमंत बिस्वा सरमा का भी अहम रोल था। दरअसल हेमंत उस वक्त कांग्रेस मे थे और उन्होंने चुनाव से पहले कई बार राहुल गांधी से मिलने की कोशिश की थी, लेकिन हर बार उन्हें राहुल से मिलने से रोक दिया जाता था, इससे नाराज होकर हेमंत भाजपा में शामिल हो गए। इसके बाद उन्होंने भाजपा के समर्थन में जमकर प्रचार किया और कांग्रेस की पोल खोली।