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नागरिकता कानून: असम में हुई हिंसा की जांच करेगी एसआईटी, सीएम बोले- आरोपियों को बख्शा नहीं जाएगा

Sat, 21 Dec 2019 09:03 AM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
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असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल - फोटो : ANI
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नागरिकता संशोधन कानून को लेकर असम में हुए विरोध प्रदर्शन की जांच के लिए असम सरकार ने एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित की है। असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने शुक्रवार को कहा कि नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है, और जो लोग हिंसा में शामिल थे, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।

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सीएम सोनोवाल ने कहा कि असम असमिया लोगों के साथ रहेगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए जिस भी कानून की आवश्यकता होगी, हम उसे लाएंगे। उन्होंने ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने असम के लोगों को आश्वासन दिया है कि असम समझौते के खंड छह को लागू करने के लिए सभी पर्याप्त उपाय किए जाएंगे।

वहीं, असम पुलिस ने शुक्रवार को कहा कि राज्य में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बहाल कर दी गई हैं और नागरिकों से अनुरोध किया कि वे सोशल मीडिया पर असत्यापित या उत्तेजक जानकारी पोस्ट या साझा करते समय सतर्क रहें।
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असम में इंटरनेट सेवा बहाल
असम पुलिस ने ट्वीट कर जानकारी दी कि असम में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को बहाल किया गया है। हम नागरिकों से अनुरोध करते हैं कि वे सोशल मीडिया पर असत्यापित / उत्तेजक जानकारी पोस्ट या साझा करते समय सतर्क रहें। हम राज्य में शांति और सद्भाव सुनिश्चित करने के लिए आपके निरंतर समर्थन की उम्मीद कर रहे हैं।

गौरतलब हो कि नागरिकता कानून को लेकर राज्य भर में बड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद इंटरनेट सेवाओं को 11 दिसंबर को निलंबित कर दिया गया था। वहीं, तेज हो रहे प्रदर्शनों को देखते हुए  16 दिसंबर को असम के 10 जिलों - लखीमपुर, तिनसुकिया, धेमाजी, डिब्रूगढ़, चराइदेव, शिवसागर, जोरहाट, गोलाघाट, कामरूप (मेट्रो) और कामरूप में अगले 24 घंटे के लिए इंटरनेट को स्थगित कर दिया गया।

भारतीय मुसलमानों और राज्य में रहने वाले लोगो की चिंता की जरूरत नहीं: मुख्यमंत्री
उसी दिन, सोनोवाल ने कहा था कि भारतीय मुसलमानों और राज्य में रहने वाले लोगों को चिंता नहीं करनी चाहिए क्योंकि कोई भी उनके अधिकारों को नहीं चुरा सकता है। सोनोवाल ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि मैं भारतीय मुसलमानों और यहां रहने वाले लोगों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि कोई भी असम की धरती के बेटों के अधिकारों को नहीं चुरा सकता है, हमारी भाषा या हमारी पहचान को कोई खतरा नहीं है। नागरिकता कानून से किसी भी तरह से असम का सम्मान प्रभावित नहीं होगा। 

उन्होंने कहा था कि नागरिकता संशोधन कानून को लेकर राज्य में विरोध कर रहे लोगों की इस पर अलग-अलग राय है। मैं गणतंत्र में विश्वास करता हूं और हर उस व्यक्ति का सम्मान करता हूं जो विरोध कर रहा है।

बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक उत्पीड़न से भागकर आए हिंदू, ईसाई, सिख, बौद्ध और पारसी समुदायों के शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देता है, जो 31 दिसंबर, 2014 को या उससे पहले भारत में दाखिल हुए थे।

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