बांग्लादेश से हो रही घुसपैठ को लेकर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने त्रिपुरा दौरे के दौरान सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने इसे सिर्फ सीमावर्ती राज्यों की नहीं, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर के अस्तित्व से जुड़ी चुनौती बताया। सरमा ने संकेत दिया कि राजनीतिक इच्छाशक्ति के बिना समाधान संभव नहीं है। ऐसे में बंगाल चुनावों को लेकर उनका बयान कई नए सवाल खड़े करता है।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गुरुवार को त्रिपुरा का दौरा किया। इस दौरान हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, 'बांग्लादेश से हो रही घुसपैठ एक बड़ी समस्या है। घुसपैठियों को त्रिपुरा, असम और बंगाल में पकड़ा जा रहा है। यह एक गंभीर मुद्दा है।' उन्होंने कहा, 'अगर पूर्वोत्तर को अपना अस्तित्व बनाए रखना है, तो हमें भारत-बांग्लादेश सीमा पर बहुत कुछ करना होगा। इसलिए, त्रिपुरा, असम और बंगाल में हमारी सरकार का होना जरूरी है।'
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बंगाल को लेकर बयान क्यों अहम माना जा रहा है?
हिमंत सरमा ने साफ तौर पर कहा कि पश्चिम बंगाल इस पूरे मुद्दे में अहम भूमिका निभाता है, लेकिन वहां राष्ट्रीय स्तर की कोशिशों पर अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं दिख रही। उन्होंने कहा कि इसी कारण वे सिर्फ असम ही नहीं, बल्कि बंगाल चुनावों को भी उम्मीद की नजर से देख रहे हैं। उनके बयान को राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है, जो आने वाले चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
असम चुनावों में सीटों को लेकर भाजपा की रणनीति क्या है?
जब उनसे पूछा गया कि क्या भाजपा असम में सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी, तो हिमंत सरमा ने कहा, 'जिन सीटों पर पार्टी का जनाधार कमजोर है, वहां जबरन उम्मीदवार उतारने का कोई मतलब नहीं। अगर कोई मित्र पार्टी वहां चुनाव लड़ना चाहती है, तो वह लड़ सकती है। अगर हम वहां चुनाव लड़ेंगे तो हमें कौन वोट देगा?'
असम में भाजपा की मौजूदा स्थिति कैसी है?
असम के मुख्यमंत्री ने कहा, 'अगर आज चुनाव होते हैं, तो हमें बहुत अच्छे नतीजे मिलेंगे। लेकिन राजनीति एक ऐसी चीज है जहां चीजें स्थिर नहीं रहतीं। इसलिए, चुनाव परिणाम आने तक कुछ भी कहना मुश्किल है। लेकिन, आज की स्थिति में भाजपा बहुत मजबूत है।'