असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि पश्चिम बंगाल के रणनीतिक रूप से बेहद अहम ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर में प्रस्तावित अंडरग्राउंड रेल लिंक से पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने का एक सुरक्षित और मजबूत मार्ग सुनिश्चित होगा। उन्होंने इसे भारत की सुरक्षा और रणनीतिक मजबूती की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि दशकों से ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर का इस्तेमाल देश विरोधी ताकतों द्वारा डराने और दबाव बनाने के लिए किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि यह संकरी भूमि पट्टी भारत की एक रणनीतिक कमजोरी रही है, जिसे बहुत पहले ही दूर कर लिया जाना चाहिए था।
'यह एक बड़ा रणनीतिक बदलाव है'
हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा प्रस्तावित अंडरग्राउंड रेल लिंक एक ऐतिहासिक रणनीतिक उपलब्धि है। इससे नॉर्थ ईस्ट और देश के बाकी हिस्सों के बीच एक सुरक्षित और भरोसेमंद परिवहन गलियारा बनेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह कमजोरी 1971 के बाद ही खत्म की जानी चाहिए थी, लेकिन अब केंद्र सरकार इस दिशा में निर्णायक कदम उठा रही है।
प्रधानमंत्री और रेल मंत्री का आभार
मुख्यमंत्री सरमा ने इस फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का धन्यवाद करते हुए कहा कि यह कदम लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक चुनौती को काफी हद तक खत्म कर देगा। उन्होंने पहले दिए गए अपने बयानों का जिक्र करते हुए कहा था कि 1971 के युद्ध के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी चाहतीं तो इस कॉरिडोर का विस्तार कराया जा सकता था, जिससे नॉर्थ ईस्ट की निर्भरता खत्म हो जाती।
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रेल मंत्री ने दी परियोजना की जानकारी
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को बताया था कि सरकार करीब 40 किलोमीटर लंबे ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर में अंडरग्राउंड रेलवे ट्रैक बिछाने की योजना पर काम कर रही है। इसके साथ ही मौजूदा रेल लाइनों को चार लाइन में बदले जाने का भी प्रस्ताव है।
क्या है ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर?
‘चिकन नेक’ कॉरिडोर, जिसे सिलीगुड़ी कॉरिडोर भी कहा जाता है, पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्से में स्थित एक संकरी भूमि पट्टी है, जिसकी चौड़ाई करीब 20–22 किलोमीटर है।
- एक ओर नेपाल और बांग्लादेश
- कुछ ही दूरी पर भूटान और चीन
- यही रास्ता नॉर्थ ईस्ट को भारत के मुख्य भूभाग से जोड़ता है
इसी वजह से यह इलाका रणनीतिक और सैन्य दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है।