फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Assam: असम विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक पेश, सीएम सरमा बोले- जरूरत पर होगी ऑन-रिकॉर्ड चर्चा

Mon, 25 May 2026 01:37 PM IST
Devesh Tripathi पीटीआई, गुवाहाटी

सार

असम विधानसभा में पेश किया गया समान नागरिक संहिता विधेयक भाजपा के देशव्यापी स्तर पर समान नागरिक संहिता लागू करने के एजेंडे के अनुरूप है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान राज्य में यूसीसी लागू करने की बात कही थी।
विज्ञापन
हिमंत बिस्वा सरमा, असम के मुख्यमंत्री - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार को कहा कि राज्य विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर विधेयक पेश करने से ऐसे कानून की आवश्यकता पर ऑन-रिकॉर्ड चर्चा का मार्ग प्रशस्त होगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह देश के संस्थापकों द्वारा दिखाए गए रास्ते को साकार करने में मदद करेगा।
विज्ञापन


मुख्यमंत्री सरमा ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "असम विधानसभा में समान नागरिक संहिता 2026 विधेयक को पेश किया गया। यूसीसी की असम को आज आवश्यकता क्यों है और यह हमारे देश के संस्थापकों द्वारा परिकल्पित मार्ग को साकार करने में कैसे मदद करेगा, इस पर ऑन-रिकॉर्ड चर्चा का मार्ग प्रशस्त करता है।"

ये भी पढ़ें: CJP: 'यह राजनीति नहीं, युवाओं की नाराजगी की आवाज', कॉकरोच जनता पार्टी पर BJP की सहयोगी TDP ने क्यों कहा ऐसा?
विज्ञापन


राज्य की अनुसूचित जनजातियों को विधेयक में मिली छूट
असम विधानसभा के कार्य मंत्री अतुल बोरा ने मुख्यमंत्री की ओर से विधानसभा में राज्य के लिए समान नागरिक संहिता, 2026 बिल पेश किया। 16वीं असम विधानसभा के पहले सत्र का सोमवार को तीसरा दिन था। विधेयक में बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने और लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव है। हालांकि, ये प्रावधान में असम में रहने वाली किसी भी अनुसूचित जनजाति पर लागू नहीं होंगे।

कांग्रेस, राइजर दल और तृणमूल कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने इस कदम का विरोध किया। विपक्ष ने विधेयक पेश करने से पहले सभी हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श की मांग की। माना जा रहा है कि इस विधेयक पर 27 मई को विधानसभा में चर्चा होगी और इसे पारित कराया जाएगा।

सीएम सरमा ने बताया क्यों लाए यूसीसी? 
यह विधेयक असम की सामाजिक संरचना और विशिष्ट जनसांख्यिकीय विविधता को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य विवाह की न्यूनतम आयु, बहुविवाह पर प्रतिबंध, माता-पिता की संपत्ति में बेटियों के समान अधिकार और लिव-इन संबंधों से संबंधित मामलों को सम्मिलित करना है।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट: कॉकरोच जनता पार्टी के खिलाफ जनहित याचिका, सीजेआई बोले- मुद्दे को भावनात्मक तरीके से न लें

उत्तराखंड, गुजरात के बाद अब असम में यूसीसी
यह विधेयक पारित होने पर असम देश का तीसरा राज्य बन जाएगा, जिसने समान नागरिक संहिता विधेयक पारित किया है। इससे पहले उत्तराखंड ने 2024 में और गुजरात ने इसी वर्ष मार्च में इस कानून को अपनाया था। उत्तराखंड इस तरह का कानून लाने वाला पहला राज्य था, जो संविधान के राज्य नीति निदेशक सिद्धांतों के अनुरूप है। अनुच्छेद 44 के अनुसार, राज्य भारत के पूरे क्षेत्र में नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुरक्षित करने का प्रयास करेगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें