अमर उजाला से खास बतचीत करते हुए डीसी आदित्य ने कहा, मुझे खुशी है कि ऐसा होनहार छात्र को एक दिन का डीसी बनाने का मौका मिला। उन्होंने बताया कि जैसा कि हर बच्चे का सपना होता है, दसवीं कक्षा में पढ़ने वाले भाग्यदीप का भी सपना है बड़े होकर प्रशासनिक अधिकारी बनने का। लेकिन असम सरकार के आरोहण कायक्रम के तहत इस छात्र को एक दिन का डीएम बनने का मौका मिला। उन्होंने कहा, इससे अन्य बच्चों में प्रेरणा मिलेगी। इससे वास्तव में एक अच्छा मैसेज बच्चों में गया है, जैसा कि सरकार चाहती थी।
यह क्या है आरोहण योजना
शिवसागर के जिला आयुक्त आदित्य विक्रम यादव ने अमर उजाला को बताया कि बोकोटा बोरबम हाई स्कूल के 16 वर्षीय छात्र भाग्यदीप को ‘आरोहण’ कार्यक्रम के तहत चुना गया है। असम सरकार ने आरोहण योजना के तहत घोषणा की थी कि जो छात्र-छात्राएं आठवीं कक्षा में अव्वल प्रदर्शन करेंगे, उनको इस तरह की योनजा में शामिल किया जाएगा। इसके तहत दूरदराज के ग्रामीण और गरीब परिवारों के प्रतिभाशाली छात्रों को पहचानकर उनके शैक्षणिक करियर में उन्हें मदद दी जाती है। शिव सागर जिले में करीब 300 बच्चों आरोहण योजना के तहत चुना गया है। यह छात्र डीसी आदित्य विक्रम यादव के हिस्से में आया था। इसलिए उन्होंने बच्चे को एक दिन का डीएम बनाया, जो कि बच्चे की भी ख्वाहिश थी। बच्चे के परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है लेकिन बच्चे का हौसला और जज्बा सातवें आसमान पर है। बच्चे के पिता एक चाय बागान में काम करते हैं जबकि उनकी मां आशा कार्यकर्ता हैं। बेटे को यहां देखकर पूरा परिवार बहुत खुश है।
सपनों को लगेंगे पंख, मिलेगी मंजिल
डीसी आदित्य ने कहा, जब मुझे पता चला कि मुझे आदिवासी बच्चा मिला है तो मुझे भी खुशी हुई। मैं सुबह उनके ‘बोकोटा नेमुगुरी ड्यूरिटिंग टी गार्डन’ के भाग्यदीप राजगढ़ के घर गया। वहां से उसे सरकारी गाड़ी में बिठाकर लाया। यहां लेकर उनको समांतर बिठाया। उनको मान और सम्मान दिया। इस दौरान भाग्यदीप ने जिला विकास समिति की दिनभर की बैठक में भाग लिया। इस दौरान उसने अपनी समस्याएं बताईं। गांव की समस्या बताई। सड़कों की समस्या बताई। स्कूल की समस्या बताई। क्योंकि इस बैठक में सभी विभाग के अधिकारी मौजूद होते हैं, तो तुरंत उनकी मांगों पर कार्यान्वयन करने को कहा गया है।
समने होंगे साकार, लगेंगे होनहारों को पंख
डीसी आदित्य विक्रम यादव ने कहा, जिस तरह की सोच को लेकर यह योजना शुरू की गई थी। उसी हिसाब से हम बच्चों में यह मैसेज देने में कामयाब हुए हैं। जो मेहनती होगा, जो होनहार होगा, उसे एक दिन मंजिल मिलेगी। वह चाहे किसी भी वर्ग से क्यों न हो। उसकी उड़ान को कोई रोक नहीं पाएगा। उसके हौसलों को थामने वाले हजारों हाथ हैं। बस, बच्चों को सपने देखना है। उनकी उड़ान को अब कोई रोक नहीं पाएगा। यही हम चाहते हैं, और यही मैसेज भी बच्चों तक गया है। भाग्यदीप को आगे बढ़ेगा ही, उसके साथ ही हजारों बच्चों को अब एक नई प्रेरणा भी मिलेगी।