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Assam: असम में बाल विवाह के खिलाफ कार्रवाई में तीन दिनों में 2278 लोग गिरफ्तार, विपक्ष ने बताया प्रचार हथकंडा

Sun, 05 Feb 2023 09:54 PM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी

सार

Assam Child Marriage Crackdown: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने शनिवार को कहा था कि राज्य पुलिस द्वारा बाल विवाह के खिलाफ शुरू किया गया अभियान 2026 में अगले विधानसभा चुनाव तक जारी रहेगा।
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असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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असम में विपक्ष की आलोचना के बीच पुलिस ने लगातार तीसरे दिन बाल विवाह के खिलाफ कार्रवाई जारी रखी। जिसके बाद रविवार तक गिरफ्तार किए गए लोगों की संख्या बढ़कर 2,278 हो गई है। असम पुलिस ने एक बयान में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ये गिरफ्तारियां राज्यभर में दर्ज 4,074 प्राथमिकियों के आधार पर की गईं। विपक्ष ने सरकार के इस कदम को 'पब्लिसिटी स्टंट' (प्रचार का हथकंडा) बताया है।

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पुलिस के मुताबिक, बिश्वनाथ में कम से कम 139, बारपेटा में 130 और धुबरी में 126 व्यक्तियों को पकड़ा गया है। इसमें कहा गया कि अन्य जिले जहां 100 से अधिक गिरफ्तारियां की गई हैं, उनमें बक्सा (123) और बोंगईगांव तथा होजाई (117) शामिल हैं। धुबरी में बाल विवाह के खिलाफ सबसे अधिक 374 मामलों में प्राथमिकी दर्ज की गई। वहीं, होजाई में 255 और मोरीगांव में 224 मामले दर्ज किए गए।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने शनिवार को कहा था कि राज्य पुलिस द्वारा बाल विवाह के खिलाफ शुरू किया गया अभियान 2026 में अगले विधानसभा चुनाव तक जारी रहेगा। शर्मा ने कहा था कि नाबालिगों की शादी में शामिल माता-पिता को फिलहाल नोटिस देकर छोड़ा जा रहा है और गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है। इसकी विपक्षी दलों ने आलोचना की थी और इस कदम को ‘प्रचार का हथकंडा’ करार दिया था।
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असदुद्दीन ओवैसी ने दी यह प्रतिक्रिया
कार्रवाई के पीछे की मंशा पर सवाल उठाते हुए एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि असम सरकार अगर वास्तव में बाल विवाह की समस्या को समझती है तो उसे साक्षरता के स्तर को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए था।

उन्होंने आरोप लगाया, 'विशेषज्ञों ने कहा है कि यदि आप बाल विवाह रोकना चाहते हैं तो आपको बहुत सारे स्कूल खोलने होंगे, लेकिन आपने (भाजपा सरकार ने) ऐसा नहीं किया। आपने मदरसों को भी बंद कर दिया है जो किसी न किसी रूप में शिक्षा प्रदान कर रहे थे।'

असम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन बोरा ने कहा कि इस मुद्दे से निपटने के लिए एक मानवीय दृष्टिकोण की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हम बाल विवाह के खिलाफ हैं। लेकिन बड़े बच्चों वाले परिवारों को बाधित करने से क्या फायदा होगा? यह एक प्रचार का हथकंडे के अलावा और कुछ नहीं है। असम जातीय परिषद प्रमुख लुरिनज्योति गोगोई ने आरोप लगाया कि सरकार ने लोगों पर इसके प्रभाव का आकलन किए बिना कार्रवाई की।

असम के मंत्रिमंडल ने हाल ही में 14 साल से कम उम्र की लड़कियों से शादी करने वाले पुरुषों के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। मंत्रिमंडल ने निर्णय लिया था कि 14-18 वर्ष आयु वर्ग की लड़कियों से विवाह करने वालों के खिलाफ बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत मामले दर्ज किए जाएंगे। साथ ही आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा और ऐसे विवाह को अवैध घोषित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा है कि 14 साल से कम उम्र की लड़कियों से शादी करने वाले पुरुषों पर गैर-जमानती आरोप लगाए जाएंगे, जबकि 14 से 18 साल की उम्र की लड़कियों से शादी करने वालों पर जमानती धाराओं के तहत आरोप लगाए जाएंगे। मंत्रिमंडल ने निर्णय लिया कि 14-18 वर्ष आयु वर्ग की लड़कियों से विवाह करने वालों के खिलाफ बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत मामले दर्ज किए जाएंगे।

इसने निर्णय लिया कि आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा और विवाह को अवैध घोषित किया जाएगा और यदि वर की आयु 14 वर्ष से कम है तो उसे सुधार गृह भेजा जाएगा। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) की रिपोर्ट के अनुसार, असम में मातृ और शिशु मृत्यु दर काफी अधिक है, जिसका प्राथमिक कारण बाल विवाह है। एनएफएचएस के अनुसार, राज्य में औसतन 31 प्रतिशत विवाह प्रतिबंधित आयु वर्ग में होते हैं।

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