Assam Cabinet Expansion: असम में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंत्रिमंडल विस्तार करते हुए अनुभवी नेताओं पर फिर भरोसा जताया है। अशोक सिंघल, पीयूष हजारिका और केशब महंत जैसे पुराने चेहरों को दोबारा कैबिनेट में जगह मिली है। वहीं अश्विनी राय सरकार, बिस्वजीत दैमारी और नीलिमा देवी जैसे नए नेताओं को पहली बार मंत्री बनाया गया। आइए, विस्तार से असम कैबिनेट के विस्तार से समझते हैं....
असम में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने शुक्रवार को अपनी सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार किया। इस विस्तार में भाजपा और सहयोगी दलों के कई नेताओं को मंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई। नई कैबिनेट की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि सरकार ने एक बार फिर अनुभवी नेताओं पर भरोसा जताया। साथ ही कुछ नए चेहरों को शामिल कर क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश भी की गई। राजभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल ने सभी नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
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किन नेताओं को कैबिनेट में जगह मिली?
मंत्रिमंडल विस्तार में भाजपा के वरिष्ठ विधायक अश्विनी राय सरकार, अशोक सिंघल और बिमल बोरा ने मंत्री पद की शपथ ली। इसके अलावा बिस्वजीत दैमारी, जयंत मल्लबरुआ और कौशिक राय को भी मंत्री बनाया गया। असम गण परिषद के नेता केशब महंत को भी फिर से कैबिनेट में जगह मिली। वहीं भाजपा के कृष्णेंदु पॉल, नीलिमा देवी, पीयूष हजारिका, रणोज पेगू और सुसांता बोरगोहैन ने भी मंत्री पद की शपथ ग्रहण की। इस विस्तार के बाद मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा समेत मंत्रिपरिषद की कुल संख्या 17 हो गई है।
क्रमांक
मंत्री का नाम
दल
1
अश्विनी राय सरकार
भाजपा
2
अशोक सिंघल
भाजपा
3
बिमल बोरा
भाजपा
4
बिस्वजीत दैमारी
भाजपा
5
जयंत मल्लबरुआ
भाजपा
6
कौशिक राय
भाजपा
7
केशब महंत
असम गण परिषद (एजीपी)
8
कृष्णेंदु पॉल
भाजपा
9
नीलिमा देवी
भाजपा
10
पीयूष हजारिका
भाजपा
11
रणोज पेगू
भाजपा
12
सुसांता बोरगोहैन
भाजपा
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पुराने चेहरों पर फिर भरोसा क्यों?
नई कैबिनेट में भाजपा नेतृत्व ने अपने अनुभवी नेताओं को दोबारा बड़ी जिम्मेदारियां देकर साफ संकेत दिया है कि सरकार स्थिरता और प्रशासनिक अनुभव को प्राथमिकता देना चाहती है। अशोक सिंघल, पीयूष हजारिका, जयंत मल्लबरुआ, रणोज पेगू और बिमल बोरा जैसे नेता पिछली सरकार में भी अहम विभाग संभाल चुके हैं। इसी तरह एजीपी के केशब महंत को फिर से मौका दिया गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सरकार विकास कार्यों की निरंतरता बनाए रखने के लिए पुराने और भरोसेमंद चेहरों को आगे रख रही है।
नए चेहरों को शामिल करने के पीछे क्या रणनीति है?
सरकार ने इस बार चार नए चेहरों को पहली बार मंत्रिपरिषद में शामिल किया है। इनमें अश्विनी राय सरकार, बिस्वजीत दैमारी, नीलिमा देवी और सुसांता बोरगोहैन का नाम शामिल है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष बिस्वजीत दैमारी को मंत्री बनाना भी अहम राजनीतिक फैसला माना जा रहा है। माना जा रहा है कि भाजपा ने इस कदम के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है। बराक घाटी से आने वाले कौशिक राय और कृष्णेंदु पॉल को दोबारा मौका देकर क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने का संदेश भी दिया गया है।
किन नेताओं को इस बार जगह नहीं मिली?
नई कैबिनेट में कुछ पुराने मंत्रियों को बाहर भी किया गया है। चंद्र मोहन पटोवारी, जोगेन मोहन और उरखाओ ग्वरा ब्रह्मा को इस बार मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली। वहीं पिछली सरकार में मंत्री रहे रंजीत कुमार दास को विधानसभा अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। इससे साफ है कि भाजपा नेतृत्व ने एक तरफ अनुभव को बनाए रखा है तो दूसरी तरफ संगठन और सरकार में नई जिम्मेदारियों का संतुलन भी बनाने की कोशिश की है। अब यह देखना अहम होगा कि नई टीम असम में भाजपा सरकार की राजनीतिक और प्रशासनिक रणनीति को कितना मजबूत करती है।