कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ग्रेट निकोबार परियोजना को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि रक्षा के नाम पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। आदिवासियों की जमीन छीनी जा रही है। परियोजना का असली मकसद होटल, कैसीनो और रियल एस्टेट विकास को बढ़ावा देना है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को केंद्र सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार का यह तर्क है कि ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना रक्षा और माल ढुलाई बंदरगाह से संबंधित है। यह एक झूठ है। इसके साथ ही आरोप लगाया कि यह असल में भारत की सबसे अमूल्य पारिस्थितिक भूमि पर एक व्यवसायी को होटल और कैसीनो बनाने में मदद करने के बारे में है।
I visited the southernmost tip of India.
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) June 5, 2026
I stood at Indira Point. I walked under trees that have stood for centuries. I dove into coral reefs among the most vibrant on earth.
And I sat with the people who live there. Tribal communities, whose land is being taken away by… pic.twitter.com/RLNtT6L0U4
'आईएनएस बाज का विस्तार कीजिए, हम साथ हैं'
'सैनिकों और आदिवासियों को विस्थापित किया गया'
उन्होंने बताया कि भारत पहले से ही केरल में एक ऐसा संयंत्र बना रहा है, जो मुख्य भूमि पर स्थित है। उन्होंने आरोप लगाया, 'वास्तव में हुआ यह है 1.5 करोड़ पेड़ काटे गए। सरकारी नक्शों से प्रवाल भित्तियों को मिटा दिया गया। सैनिकों और आदिवासियों को विस्थापित किया गया। क्योंकि एक व्यवसायी भारत की सबसे अमूल्य पारिस्थितिक भूमि पर होटल और कैसीनो बना सके।' उन्होंने कहा, 'मैंने जिन भी युवा भारतीयों से बात की है। वह सभी इस बात को समझते हैं। आप जानते हैं कि किसी भी तरह का मुनाफा उस चीज को नष्ट करने के लायक नहीं है जिसे कभी वापस नहीं पाया जा सकता।'
'हजारों पेड़ों को काट कर बाहर भेजते हैं'
गांधी ने कहा कि वह पारिस्थितिक रूप से संतुलित विकास के पक्षधर हैं। उन्होंने दावा किया कि ये द्वीप दुनिया के सबसे असाधारण टिकाऊ पर्यटन स्थल बन सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि यही वह भारत है जिसके लिए लड़ना सार्थक है। यह वह है जो मोदी नहीं चाहते कि आप देखें। योजना क्या है? राहुल गांधी ने वीडियो में कहते हैं' योजना यह है कि आप इन हजारों पेड़ों को काटते हैं। उन्हें अवैध रूप से बाहर भेजते हैं। अरबों-खरबों डॉलर कमाते हैं। उस पैसे का इस्तेमाल आप अपने होटल, कैसीनो और रियल एस्टेट बनाने में करते हैं। यही हो रहा है।'
लोगों से जमीन छीन रहे हैं
उन्होंने बताया कि जिस क्षेत्र की बात हो रही है, वह नई दिल्ली के आकार से लगभग चार गुना बड़ा है। उन्होंने कहा कि सरकार इस परियोजना का निर्माण देश के सबसे स्वच्छ पारिस्थितिक वातावरण में कर रही है। गांधी का आरोप है, 'वह उन लोगों से जमीन छीन रहे हैं, जिन्हें वहां बसाया गया था। वह आदिवासियों से भी जमीन छीन रहे हैं।' गांधी कहते हैं, 'आईएनएस बाज भी तट पर है। असल बात यह है कि वह गौतम अडानी की मदद करना चाहते हैं और यह अपराधी भारतीय जमीन हड़पने के लिए नौसेना और सेना की आड़ ले रहे हैं। वह कह रहे हैं कि वह एक ट्रांसशिपमेंट पोर्ट बनाना चाहते हैं, लेकिन यह संभव नहीं है क्योंकि वह पहले से ही केरल में एक बंदरगाह बना रहे हैं, जो मुख्य भूमि पर है, इसलिए यह पहला झूठ है।'
होटल और गेस्ट हाउस का रक्षा में क्या भूमिका
आगे उन्होंने वीडियो में कहा कि दूसरा मुद्दा। कृपया मुझे समझाएं कि होटल और गेस्ट हाउस हमारे देश की रक्षा में कैसे भूमिका निभाते हैं। इनका आपस में क्या संबंध है। वह एक और झूठ बोल रहे हैं कि इस जंगल में प्रति हेक्टेयर 145 पेड़ हैं। इस जंगल में कुछ मीटर के दायरे में 145 पेड़ हैं।
1.5 करोड़ पेड़ चुराना चाहते हैं
गांधी का आरोप है, 'समस्या यह है कि आप 1.5 करोड़ पेड़ चुराना चाहते हैं, जिनमें से प्रत्येक की कीमत 3 लाख रुपये है, और उससे अपनी छोटी-मोटी अचल संपत्ति को वित्त पोषित करना चाहते हैं।' गांधी कहते हैं, 'इसलिए मुझे भारत की रक्षा के बारे में यह बकवास मत सुनाइए। भाजपा का हर वह व्यक्ति जो इसे फैला रहा है, वह अडानी, उनके हितों और प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) के साथ उनके संबंधों की रक्षा करने की कोशिश कर रहा है।' उनका कहना है कि आईएनएस बाज को विस्तार का पूरा अधिकार दिया जाना चाहिए।
इसके साथ ही उन्होंने देशवासियों से मुहिम से जुड़ने की अपील की। उन्होंने एक्स पर लिखा,’ अंडमान और निकोबार भारत की सबसे अनमोल प्राकृतिक धरोहर हैं। वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए इनकी रक्षा करना मेरा कर्तव्य है। मेरे साथ जुड़ें और इस अमूल्य धरोहर को बचाने की लड़ाई में भागीदार बनें।'
राहुल गांधी के वीडियो को टैग करते हुए कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना एक 'पारिस्थितिक आपदा' है। रमेश ने एक्स पर कहा, 'इसके लिए अब मनगढ़ंत रणनीतिक कारण बताए जा रहे हैं जबकि अन्य विकल्प मौजूद हैं। परियोजना के लिए पर्यावरण और वन संबंधी स्वीकृतियां फर्जी आधार पर दी गई हैं।'