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Assam: विधानसभा सत्र के आखिरी दिन भूमि और वाहन कराधान विधेयक पारित, अब जमीन के लिए प्रीमियम भुगतान करना होगा

Sat, 31 Aug 2024 03:10 AM IST
दीपक कुमार शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भुवनेश्वर

सार

राजस्व मंत्री जोगेन मोहन ने असम भूमि जोत सीमा निर्धारण (संशोधन) विधेयक, 2024 और असम कृषि भूमि (गैर-कृषि प्रयोजन के लिए पुनर्वर्गीकरण और हस्तांतरण का विनियमन) (संशोधन) विधेयक, 2024 को विचार और पारित करने के लिए सदन में पेश किया। उन्होंने कहा कि संशोधन का उद्देश्य दशकों से चाय बागान की भूमि पर बसे लोगों को अधिकार देने में आने वाली समस्याओं को कम करना है। 
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असम विधानसभा - फोटो : ANI
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विस्तार
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असम विधानसभा में शरद सत्र के आखिरी दिन भूमि संबंधी दो कानूनों में संशोधन किया गया, जिनमें से एक कृषि भूमि के पुनर्वर्गीकरण से संबंधित है। इसके अलावा, सदन में असम लोक सेवाओं का अधिकार (संशोधन) विधेयक और असम मोटर वाहन कराधान (संशोधन) विधेयक भी पारित किया गया। 

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राजस्व मंत्री जोगेन मोहन ने असम भूमि जोत सीमा निर्धारण (संशोधन) विधेयक, 2024 और असम कृषि भूमि (गैर-कृषि प्रयोजन के लिए पुनर्वर्गीकरण और हस्तांतरण का विनियमन) (संशोधन) विधेयक, 2024 को विचार और पारित करने के लिए सदन में पेश किया। उन्होंने कहा कि संशोधन का उद्देश्य दशकों से चाय बागान की भूमि पर बसे लोगों को अधिकार देने में आने वाली समस्याओं को कम करना है। 

'असम भूमि जोत सीमा निर्धारण (संशोधन) विधेयक, 2024' प्रीमियम के भुगतान पर अन्य उद्देश्यों के उपयोग के लिए 'विशेष भूमि' (मुख्य रूप से चाय की खेती के लिए आवंटित) के हस्तांतरण से संबंधित है।
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मोहन ने कहा, 'लोगों को जमीन के लिए प्रीमियम का भुगतान करना होगा, क्योंकि सरकारी जमीन मुफ्त में नहीं दी जा सकती।' कहा कि संशोधन विधेयक के माध्यम से एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि लोगों को, यदि वे चाहें तो भूखंड को राजस्व भूमि में परिवर्तित करने के तुरंत बाद किसी तीसरे पक्ष को जमीन बेचने की अनुमति दी जाएगी, जिससे मूल में आवश्यक प्रतीक्षा अवधि समाप्त हो जाएगी। 

नारा ने भूमि हस्तांतरण के प्रावधान को बताया दोहरी सजा
इस पर कांग्रेस विधायक भरत चंद्र नारा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि आधिकारिक मंजूरी के बिना गैर-चाय उगाने वाले उद्देश्यों के लिए विशेष भूमि के हस्तांतरण के लिए जुर्माना और कारावास लगाने का प्रावधान उसी उल्लंघन के लिए 'दोहरी सजा' का एक उदाहरण है। उन्होंने दावा किया, 'जो व्यक्ति बिना मंजूरी के जमीन हस्तांतरित करेगा, सरकार उससे जमीन छीन लेगी। फिर, उसी कारण से जेल की सजा या जुर्माना दोगुनी सजा के बराबर होगा।'

इस दौरान नारा ने पुनर्वर्गीकृत कृषि भूमि में 'लघु उद्योग' की स्थापना के लिए प्रीमियम माफ करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, 'मध्यम या बड़े उद्योगों के लिए प्रीमियम लिया जा सकता है। लेकिन छोटे उद्योगों के लिए इसे माफ किया जाना चाहिए। साथ ही, कृषि भूमि के पुनर्वर्गीकरण के लिए किए गए आवेदनों के निपटान के लिए समय सीमा होनी चाहिए।'



वहीं, संसदीय कार्य मंत्री पीयूष हजारिका ने कहा कि प्रीमियम भले ही न्यूनतम राशि हो, यह सुनिश्चित करने के लिए लिया जाना चाहिए कि कोई भी छोटे उद्योग स्थापित करने के नाम पर अनुमति से अधिक भूमि पर कब्जा करने की कोशिश न करे। कहा कि सरकार की कारोबार सुगमता नीति के अनुसरण में आवेदनों का समयबद्ध निपटान सुनिश्चित किया जाएगा।

कांग्रेस विधायक नारा ने अस्पष्टता का दावा किया
नारा ने इस प्रावधान में अस्पष्टता का दावा किया कि यदि तीन साल के भीतर कोई उद्योग स्थापित नहीं किया गया तो वाणिज्यिक के रूप में अधिसूचित कृषि भूमि को 'कृषि' के रूप में पुनः वर्गीकृत किया जाएगा। वहीं, एआईयूडीएफ के अमीनुल इस्लाम ने बताया कि संशोधन विधेयक भूमि में कृषि गतिविधियों को जारी रखने की अनुमति नहीं देता है, अगर इसे वाणिज्यिक भूमि के रूप में पुनर्वर्गीकृत किया जाता है।

राजस्व मंत्री मोहन ने इनका जवाब दिया और कहा, मूल अधिनियम के प्रावधान ऐसे मामलों में लागू होंगे, जो पुनर्वर्गीकृत भूमि में भी कृषि गतिविधियों की अनुमति देते हैं।

इसके अलावा, परिवहन मंत्री केशब महंत ने असम मोटर वाहन कराधान (संशोधन) विधेयक, 2024' के पारित करने के पीछे का उद्देश्य बताया। उन्होंने कहा कि इसे करों में वृद्धि के लिए नहीं लाया गया है, बल्कि इससे वाहन मालिकों, विशेषकर छोटे यात्री वाणिज्यिक वाहनों को भी मदद मिलेगी।

स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए सुरक्षा उपाय लागू करने का आदेश
असम सरकार ने शुक्रवार को राज्यभर के सभी अस्पतालों में चिकित्सकों और स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए तुरंत सुरक्षा उपाय लागू करने का निर्देश दिया।

मुख्य सचिव रवि कोटा ने पुलिस महानिदेशक जीपी सिंह के साथ मेडिकल कॉलेज में सुरक्षा की समीक्षा के लिए एक बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में सीसीटीवी कवरेज, स्कैनर तंत्र, पुलिस चौकियों और सरकारी एवं निजी अस्पतालों में स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए शौचालय सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया। बैठक तीन सप्ताह पहले पश्चिम बंगाल में कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक महिला चिकित्सक के साथ कथित दुष्कर्म और हत्या की घटना के मद्देनजर गृह मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद आयोजित की गई।

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