आसाम के तिनसुकिया में नरेंद्र मोदी ने बजाया चुनावी बिगुल
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असम विधानसभा चुनावों में अगर प्रचार अभियान की बात करें तो केंद्र के मोदी का मुकाबला असम के मोदी(गोगोई) से है। क्योंकि मुख्यमंत्री तरुण गोगोई बिल्कुल उसी अंदाज में चुनाव लड़ रहे हैं, जैसे कभी नरेंद्र मोदी गुजरात में चुनाव लड़ते थे। असम में चुनाव प्रचार अभियान की रणनीती कांग्रेस और भाजपा की रणनीति एक दूसरे के बिल्कुल उलट है। कांग्रेस जहां पूरा चुनाव अपने मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के सहारे लड़ रही है, वहीं भाजपा ने मोदी-शाह की जोड़ी के साथ अपने स्थानीय नेतृत्व को भी उभारा है। जबकि कांग्रेस के प्रचार अभियान से केंद्रीय नेताओं के चेहरे लगभग गायब हैं। गोगोई कुछ उसी अंदाज में यह चुनाव लड़ रहे हैं जिस अंदाज में गुजरात में कभी मुख्यमंत्री रहते हुए नरेंद्र मोदी लड़ा करते थे और भाजपा उस तरह लड़ रही है, जैसे गुजरात में कांग्रेस लड़ती थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की अगुआई में भारतीय जनता पार्टी अब नहीं तो कभी नहीं की तर्ज पर चुनाव मैदान में है। शायद बिहार चुनाव के नतीजों से सबक लेकर भाजपा नेतृत्व ने अपने स्थानीय नेता और मुख्यमंत्री के उम्मीदवार बनाए गए केंद्रीय खेल एवं युवा कल्याण राज्य मंत्री सर्वानंद सोनोवाल को भी मोदी और शाह के बराबर अहमियत दी है। जबकि पिछले 15 साल से सरकार चला रही कांग्रेस को मुख्यमंत्री तरुण गोगोई की अखिल असमिया नेता की छवि का पूरा भरोसा है। अपने एक कद्दावर नेता हेमंत विश्वसर्मा की बगावत और उनके अपने साथी विधायकों के साथ भाजपा में चले जाने के बावजूद कांग्रेस को गोगोई के करिश्मे पर इस कदर यकीन है कि उसने राज्य की करीब तीन दर्जन मुस्लिम बहुल सीटों पर खासा असर रखने वाले बदरुद्दीन अजमल के साथ भी कोई गठबंधन नहीं किया है।
गुवाहाटी के लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई हवाई अड्डे से बाहर निकलते ही सामने दो बड़े होर्हिंग्स दिखाई देते हैं। असमिया में लिखे इन होर्डिंग्स में एक भाजपा का है जबकि दूसरा कांग्रेस का। एक दूसरे के बराबर खड़े इन होर्डिंग्सं में जहां भाजपा ने नरेंद्र मोदी अमित शाह और सोनोवाल की तस्वीरें लगाई हैं, वहीं कांग्रेस ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी को नेपथ्य में रखते हुए सिर्फ तरुण गोगोई की बड़ी तस्वीर लगाई है। आगे निकलने पर गुवाहाटी शहर के हर चौराहे और नुक्कड़ पर कमोबेश यही दृश्य दिखाई देता है। भाजपा के प्रचार में जहां दो राष्ट्रीय नेताओं के साथ एक स्थानीय चेहरा भी उसी प्रमुखता से है, वहीं कांग्रेस के प्रचार अभियान में सिर्फ तरुण गोगोई हैं।
हालांकि गुवाहाटी शहर में लोग भाजपा और कांग्रेस के मुकाबले की चर्चा करते हुए मिलते हैं। लेकिन जिस तरह 2014 के लोकसभा चुनावों में यहां भाजपा की एकतरफा लहर थी, वैसी हवा नहीं दिखती है। लोग कहते हैं कि लोकसभा चुनावों जैसा माहौल नहीं है। इसके बावजूद कई ऐसे लोग भी मिलते हैं जिन्होंने हमेशा कांग्रेस को वोट दिया लेकिन पिछले लोकसभा चुनावों में भाजपा के साथ चले गए थे, उन्हें भाजपा से कुछ उम्मीद जरूर दिखती है। और यही मतदाता भाजपा के लिए भी उम्मीद जगाते हैं। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए पूर्व मंत्री हेमंत विश्वसर्मा का गुवाहाटी शहर में अच्छा प्रभाव माना जाता है। हालांकि विश्वसर्मा का शहर के मुस्लिम मतदाताओं पर खासा असर था, लेकिन उनके भाजपा में चले जाने के बाद अब यह असर कितना रहेगा, इसे लेकर भी सवाल हैं। लेकिन विश्वसर्मा भाजपा को जिताने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं। यह अलग बात है कि कभी विश्वसर्मा के ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर भाजपा उनका इस्तीफा भी मांगती थी।