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असम-पश्चिम बंगाल चुनाव: पहले चरण में बरसे वोट, बंगाल में छिटपुट झड़प के बीच उमड़े मतदाता

Sun, 28 Mar 2021 06:59 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

  • पहले चरण में ऊपरी असम की 42 और मध्य असम की 5 सीटों पर हुआ मतदान 
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असम के ढुबरी में मतदान के लिए कतार में खड़े लोग - फोटो : ANI
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विस्तार
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पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में सबसे ज्यादा सुर्खियां भले ही बंगाल का चुनाव बटोर रहा है मगर भाजपा के लिए असम का चुनाव अहम है। बंगाल के चुनाव मे भाजपा के लिए खोने को कुछ भी नहीं है मगर असम में उसके सामने सत्ता बचाए रखने की चुनौती है। असम में कुल तीन चरणों के तहत पहले चरण का चुनाव शनिवार को हुआ।

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अगले दो चरणों के मतदान एक और छह अप्रैल को होने हैं। पहले चरण के तहत 11 जिलों की 47 सीटों पर मतदान हुआ। इसमें  विभिन्न दलों के 264 उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर है। पहले चरण में कुल 81 लाख मतदाता अपने मतदान का प्रयोग कर सत्ता पर आसीन होने वाली पार्टी का भविष्य तय करेंगे। ऊपरी असम में जहां 42 सीटें हैं तो मध्यम असम में 5 सीटें हैं। 

भाजपा के लिए क्यों महत्वपूर्ण है पहला चरण 
भाजपा ने 2016 के विधानसभा चुनाव में अपने सहयोगी असम गण परिषद के साथ मिलकर 35 सीटें जीती थीं। भाजपा को यहां 27 सीटें मिलीं तो असम गण परिषद ने 8 सीटें हासिल कीं। वहीं, कांग्रेस ने यहां 9 सीटें जीती थीं।  असम में इस बार भाजपा को एकजुट विपक्ष से कड़ी टक्कर मिल रही है। इस बार कांग्रेस, वामपंथी दल और एआईयूडीएफ के एक साथ आने पर मुकाबला दिलचस्प हो गया है। ऊपरी असम में कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक रहा है, जबकि एआईयूडीएफ अल्पसंख्यक वोटरों जोड़ने में मदद करेगी। पहले चरण के मतदान कांग्रेस और भाजपा गठबंधन जिसको बढ़त मिलेगी, वही सत्ता के करीब होगा। 
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असम के लिए अवैध घुसपैठियों का मुद्दा अहम
असम में बांग्लादेश से घुसपैठ का मुद्दा हमेशा से अहम रहा है। यहां ऐतिहासिक छात्र आंदोलन के बाद छात्र नेताओं की सरकार भी इसी मुद्दे पर बनी थी। यहां के मूल बाशिंदें असमिया अस्मिता के लिए इसे बड़ा खतरा मानते रहे हैं। इसलिए यहां एनआरसी और सीएए महत्वपूर्ण मुद्दा है। सीएए को लेकर भी ब्रह्मपुत्र और बराक वैली की जनता का अपना-अपना मत है। भाजपा और उनके सहयोगी जहां सीएए के समर्थन में हैं तो कांग्रेस गठबंधन यहां सीएए के विरोध में चुनाव लड़ रहा है। इस मुद्दे पर ही भाजपा के पुराने सहयोगी बीपीएफ ने भी पाला बदल लिया है।   


असम में सरकारी जमीनों पर बसे भूमिहीनों को जमीनी पट्टा देने का मामला एक बड़ा मुद्दा है। कृषक मुक्ति संग्राम समिति लंबे समय से इस मुद्दे पर आंदोलन करती रही है। चाय समुदाय को सुविधाएं और उनकी दैनिक मजदूरी में वृद्धि भी एक बड़ा मुद्दा है।  


बड़े चेहरे जिनकी किस्मत दांव पर  
माजुली नदी द्वीप से मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल
हितेंद्र नाथ गोस्वामी (जोरहाट)
रंजीत दत्ता (बेहाली)
संजय किसान (तिनसुकिया) 
 मंत्री अतुल बोरा (बोकाखात)
केशव महंत (कलियाबोर) 
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रिपुन बोरा (गोहपुर)  
देवव्रत सैकिया (नाजिरा)
भूपेन बोरा (बिहपुरिया)

ऊपरी और मध्य असम में 2016 में किनका रहा कब्जा  
भाजपा 27 सीट
असम गण परिषद 8 सीट 
कांग्रेस 9 सीट 
एआईयूडीएफ ्2 सीट
अन्य 1 सीट 

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बंगाल में खेला होबे, पहले चरण में तीस सीटों पर हुआ मतदान

 कड़ी सुरक्षा और कोविड प्रोटोकॉल के बीच पश्चिम बंगाल में सत्ता के लिए खेला (खेल) शनिवार को पहले चरण के मतदान के साथ शुरू हो गया। छिटपुट हिंसा के बीच पहले चरण में पांच जिलों की कुल तीस सीटों पर 79.79 फीसदी मतदान हुआ। इधर, पूर्वी मेदिनीपुर के कांथी में भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के छोटे भाई सौमेंदु की कार पर कुछ असामाजिक तत्वों ने हमला किया, जिसमें उनकी कार क्षतिग्रस्त हो गई। इस हमले में वह तो बच गए मगर उनका ड्राइवर घायल हो गया। पार्टी ने आरोप लगाया है कि यह हमला तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने किया था। 

73 लाख से अधिक मतदाताओं वाली इन सीटों पर 191 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम के हवाले हो गई। उम्मीदवारों में 170 महिला एवं 21 पुरुष हैं। कुल 10,288 मतदान केंद्रों पर मतदाताओं ने मताधिकार का प्रयोग किया। इस चरण में भाजपा के लिए जहां 2019 लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन को दोहराने की चुनौती होगी। वहीं, तृणमूल कांग्रेस और वाम दलों के लिए अपनी खोई जमीन हासिल करने मौका।

खेला होबे का जवाब भाजपा ने विकास होबे से दिया
राज्य में सत्तासीन तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस और वाम दल गठजोड़ और भारतीय जनता पार्टी चुनावी मैदान में हैं। पहले चरण के लिए चुनाव प्रचार में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा ने धुआंधार रैलियां कीं। चुनाव प्रचार अभियान में इन दोनों पार्टियों से कांग्रेस और माकपा पिछड़ती दिखीं। 2019 के चुनाव परिणामों से उत्साहित भाजपा ने इस बार पूरा जोर लगाया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और अन्य केंद्रीय मंत्रियों ने पांचों जिलों में जमकर प्रचार किया। भाजपा ने जहां जय श्री राम का नारा दिया, वहीं तृणमूल ने 'खेला होबे' (यानी खेल होगा) का नारा दिया था मगर अब यह नारा सभी पार्टियों द्वारा इस्तेमाल हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खड़गपुर, कांथी, बांकुड़ा और पुरुलिया की रैलियों में तृणमूल पर निशाना साधते हुए कहा था, अब खेला शेष, विकास शुरू। 

प्रधानमंत्री ने कहा था, दीदी बोले खेला होबे, बीजेपी बोले चाकरी होबे, दीदी बोले खेला होबे, बीजेपी बोले विकास होबे, दीदी बोले खेला होबे, बीजेपी बोले शिक्षा होबे। खेला शेष होबे विकास आरंभ होबे। भाजपा ने पूरे प्रचार अभियान में आसोल पोरिबोर्तन (यानी असल परिवर्तन) का वादा किया। सोनार बांग्ला का बनाने का वादा किया। भाजपा ने तृणमूल पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए अम्फान के लिए आई केंद्रीय राशि में घोटाले का आरोप लगाया। इसके साथ ही तोलाबाजी (उगाही) और कटमनी के भी आरोप लगाए।

वहीं, ममता बनर्जी अपनी हर रैली में भाजपा नेतृत्व पर तीखे हमले करते दिखीं। ममता बनर्जी ने कहा, हम मोदी का चेहरा नहीं देखना चाहते। लुटेरे और दंगाइयों को हम नहीं चाहते। हमें दुर्योधन और दु:शासन नहीं चाहिए। उनका निशाना प्रधानमंत्री और गृहमंत्री पर था।


इन पांच जिलों में हुए मतदान 
पुरुलिया
बांकुड़ा
झारग्राम
प. मेदिनीपुर
पूर्व मेदिनीपुर

स्टार उम्मीदवार
अभिनेत्री जून मालिहा, तृणमूल (मेदिनीपुर)
सुखमय सतपति, जिला भाजपा अध्यक्ष (झारग्राम)
नेपाल महतो, चार बार के कांग्रेस विधायक (बाघमुंडी)
सुशांत घोष, संयुक्त मोर्चा (सालबनी) 

पहले चरण में सुरक्षा बलों की 730 कंपनियां रहीं तैनात
चुनाव आयोग ने कुल 37 पर्यवेक्षक नियुक्त किए हैं, जिनमें सात पुलिस पर्यवेक्षक हैं। पहले चरण में सुरक्षा बलों की 730 कंपनियों को तैनात किया गया, जिनमें 92 बांकुड़ा में, 169 पूर्व मेदिनीपुर में, 139 पश्चिम मेदिनीपुर में, 186 पुरुलिया और 144 झारग्राम में 294 सीट वाली बंगाल विधानसभा में कुल आठ चरणों में मतदान होने हैं। 29 अप्रैल को यहां अंतिम चरण के मतदान होने हैं। मतों की गिनती 2 मई को होगी।
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