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पीएम मोदी ने देश को दिया सबसे लंबे पुल का तोहफा, जानें खास बातें

Tue, 25 Dec 2018 10:54 AM IST
अंकुर श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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PM Narendra Modi - फोटो : ANI
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बोगीबील पुल से गुजरने वाली पहली यात्री रेलगाड़ी को हरी झंडी दिखाकर देश के सबसे लंबे इस रेल सह सड़क पुल की शुभारंभ किया। तिनसुकिया-नाहरलगुन इंटरसिटी एक्सप्रेस सप्ताह में पांच दिन चलेगी। कुल 4.9 किलोमीटर लंबे इस पुल की मदद से असम के तिनसुकिया से अरूणाचल प्रदेश के नाहरलगुन कस्बे तक की रेलयात्रा में लगने वाले समय में 10 घंटे से अधिक की कमी आने की उम्मीद है। 
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बताया जा रहा है कि यह एशिया का दूसरा जबकि भारत का सबसे लंबा रेल सह सड़क पुल है।
 



आइये आपको बताते हैं इस पुल से जुड़ी कुछ खास बातें-

इस पुल को चीन के साथ लगती सीमा पर रक्षा साजो-सामान के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन माना जा रहा है। इस पुल की लंबाई 4.94 किलोमीटर है। यह पुल असम के डिब्रूगढ़ को धीमाजी से जोड़ेगा।
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यह पुल 1987 के असम संधि का हिस्सा है। इस पुल की आधारशिला 1997 में तत्कालीन प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने रखी थी। हालांकि इसका निर्माण कार्य 2002 में अटल सरकार में शुरू किया गया।

भारत और चीन के बीच 4000 किलोमीटर की सीमा है ऐसे में यह पुल भारतीय सेना की गतिविधियों में मददगार साबित होगा। 

पुल के निर्माण में पांच हजार नौ सौ करोड़ की लागत आई है और यह 120 सालों तक निरंतर सेवा दे सकता है।

एशिया के इस दूसरे सबसे बड़े पुल में सबसे ऊपर एक तीन लेन की सड़क है और उसके नीचे दोहरी रेल लाइन है। यह पुल ब्रह्मपुत्र के जलस्तर से 32 मीटर की ऊंचाई पर है। इसे स्वीडन और डेनमार्क को जोड़ने वाले पुल की तर्ज पर बनाया गया है।

यह पुल डिब्रूगढ़ से 17 किमी की दूरी पर है। यहां से सबसे नजदीकी सड़क पुल 225 किमी जबकि सबसे नजदीकी रेल पुल 560 किमी दूर है।  ऐसे में यह पुल स्थानीय लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन ने इस पुल को मैग्नेटिक पार्टिकल टेस्टिंग, ड्राई पेनिट्रेशन टेस्टिंग तथा अल्ट्रासोनिक टेस्टिंग जैसी आधुनिकतम तकनीकों का इस्तेमाल करके इसे यूरोपीय मानकों के अनुरूप बनाया है। 

इसके लिए बीम बनाने के लिए इटली से विशेष मशीन मंगाई गई और बीम को पिलर पर चढ़ाने के लिए 1000 टन के हाइड्रॉलिक और स्ट्रैंड जैक का इस्तेमाल किया गया। यह देश का पहला ऐसा पुल है दो पूरी तरह से वेल्ड करके बनाया गया है। 

बोगीबील पुल भूकंप प्रभावित क्षेत्र में बना है। यहां रिक्टर पैमाने के 7 स्केल तक का भूकंप आता रहा है। इस पुल को भूकंपरोधी बनाया गया है जो 7 तीव्रता से ज्यादा के भूकंप में भी धराशायी नहीं होगा।

अभी डिब्रूगढ़ से अरुणाचल प्रदेश जाने के लिए व्यक्ति को गुवाहाटी होकर जाना होता है और उसे 500 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करनी होती है। इस पुल के निर्माण से से यह यात्रा अब 100 किलोमीटर कम हो जाएगी।
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यह पुल अरुणाचल में बॉर्डर के समीप भारत यातायात सुगम बनाने के प्रोजेक्ट का हिस्सा है। इसमें ब्रह्मपुत्र के उत्तरी छोर पर ट्रांस अरुणाचल हाईवे और नदी के ऊपर नया रेल और रोड लिंक का निर्माण शामिल है।
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