आम आदमी पार्टी (आप) के नेता अशोक ओझा ने गुजरात पुलिस के आरोपों को सिरे से नकार दिया है। पुलिस ने आरोप लगाया है कि उन्होंने पार्टी के एक कार्यकर्ता के पास फर्जी इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) कॉल करवाई थी। अशोक ओझा का कहना है कि उन्हें इस मामले में गलत तरीके से फंसाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस उनसे पार्टी के अंदरूनी कामकाज और पैसों के लेनदेन के बारे में सवाल-जवाब कर रही है।
उपमुख्यमंत्री ने क्या आरोप लगाया?
जांचकर्ताओं ने आरोप लगाया कि यह कॉल पार्टी के भीतर की प्रतिद्वंद्विता से उपजे षड्यंत्र का हिस्सा थी। ओझा को वडोदरा में संगठनात्मक जिम्मेदारियां सौंपे जाने के बाद उन्हें अपना राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी मानते थे। कॉल का उद्देश्य ओझा को डराना और उन्हें शहर छोड़ने के लिए मजबूर करना था। गिरफ्तारियों ने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया, जिसमें गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने केजरीवाल पर झूठे दावे फैलाने का आरोप लगाया। संघवी ने कहा कि आम आदमी ने बताया की फोन नंबर 'आपके अपने आदमी' का था। उन्होंने सवाल उठाया कि केजरीवाल कॉल करने वाले को सूचना और संचार अधिकारी के रूप में क्यों पेश कर रहे हैं।
आप नेता ने आरोपों पर क्या कहा?
गिरफ्तारी के बाद पहली बार आरोपों का जवाब देते हुए ओझा ने कहा कि पुलिस का बयान मनगढ़ंत है। उन्होंने कभी किसी को सूचना और संचार अधिकारी होने का नाटक करने का निर्देश नहीं दिया था। उन्होंने कहा, 'मैं सिर्फ एक बात कहना चाहता हूं, जो कॉल की गई थी, वह मैंने सूचना ब्यूरो (आईबी) को यह पूछने के लिए की थी कि 'आपकी क्या आवश्यकता है?' हमारे पदाधिकारी केशव चौहान भी कॉन्फ्रेंस कॉल पर मौजूद थे। मैंने यह फोन इसलिए नहीं किया था कि आप यह करें और आईबी से होने का नाटक करके कॉल करें।'
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'केजरीवाल के ठहरने का खर्च कहां से आया'
ओझा ने आरोप लगाया कि पुलिस द्वारा ले जाए जाने के बाद एक महिला ने उनसे लगभग दो घंटे तक पूछताछ की, जिसने खुद को पुलिस इंस्पेक्टर बताया। पूछताछ कथित कॉल पर केंद्रित नहीं थी, बल्कि पार्टी की संगठनात्मक संरचना और धन स्रोतों पर केंद्रित थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि पार्टी के वित्त को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। ओझा ने कहा, 'उस महिला ने मुझसे पूछा कि गुजरात और वडोदरा में हमारा फंड कहां से आता है। 24 से 26 मई तक केजरीवाल के ठहरने का खर्च कहां से आया।'
संघवी को सीधे संबोधित करते हुए ओझा ने राज्य सरकार पर इस मामले का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। ओझा कहा, 'आज मैं हर्ष संघवी से सीधे पूछना चाहता हूं, क्या आप लोग हिरासत में लेकर, धमकाकर और उनके खिलाफ झूठे मामले दर्ज करके राजनीति करना चाहते हैं?' ओझा ने उस अधिकारी की पहचान पर भी सवाल उठाया जिसने कथित तौर पर उनसे पूछताछ की थी। पुलिस के इस आरोप को खारिज करते हुए कि यह घटना पार्टी की अंदरुनी आपसी प्रतिद्वंद्विता का परिणाम है। इस पर ओझा ने कहा, 'मेरी ओर से कोई साजिश नहीं है। मैं आम आदमी पार्टी का निष्ठावान सदस्य हूं और हमेशा निष्ठावान रहूंगा।' फिलहाल आनंद साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है और जांच अभी जारी है।