चूंकि मंत्रिमंडल विस्तार 2019 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर किया गया है, इसलिए अब विभाग भी उसी हिसाब से अलॉट किए जाएंगे। यही वजह रही कि इन दोनों नेताओं को दिल्ली बुलाया गया है। राजस्थान में लोकसभा की 25 सीटें हैं। पार्टी का प्रयास है कि कृषि, वित्त, बिजली और शिक्षा-स्वास्थ्य को लेकर दोनों खेमों में कोई गतिरोध पैदा न हो।
इन विभागों के मंत्रियों को जल्द से जल्द अपनी प्रतिभा दिखानी होगी, क्योंकि लोकसभा चुनाव अगर अप्रैल मई में होते हैं तो दो माह पहले आचार संहिता लागू हो जाएगी। इससे सरकार की नई विकास योजनाओं पर थोड़ा विराम लग सकता है। गहलोत सरकार का प्रयास रहेगा कि लोकसभा चुनाव की घोषणा से पहले कम से कम जनता को यह भरोसा दिलाया जाए कि चुनाव पूर्व किया गया एक-एक वादा पूरा किया जाएगा।
राहुल गांधी के साथ हुई बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के मामले पर भी विचार किया गया है। फिलहाल उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट राजस्थान में पार्टी के अध्यक्ष हैं। अब यह जिम्मेदारी किसी दूसरे नेता को दी जाएगी। लोकसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी इस पद पर किसी फुलटाइम नेता को लाना चाहती है। माना जा रहा है कि एक-दो दिन में सभी मंत्रियों को विभाग सौंप दिए जाएंगे।