उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के गांव निबुही कलां का 20 वर्षीय युवक सुरेश मुंबई में एक जूस शॉप पर काम करता था। लॉकडाउन के बाद सुरेश अन्य प्रवासी मजदूरों के साथ मई की शुरुआत में एक ट्रक में पांच दिन का सफर कर गांव लौट आया। गांव की आशा कार्यकत्री चंद्रप्रभा ने सुरेश की जानकारी मिलते ही उससे मिलकर स्वास्थ्य का पूरा ब्योरा लिया और जिले की रैपिड रिस्पांस टीम को जानकारी दी, जिसने तत्काल पहुंचकर सुरेश को घर पर ही क्वारंटीन कर दिया।
चंद्रप्रभा ने क्वारंटीन के दौरान सुरेश से दूरी रखने के लिए घर के अन्य सदस्यों की काउंसिलिंग की और समय-समय पर सुरेश के स्वास्थ्य का हाल लेती रही। नतीजा ये रहा कि सुरेश में कोरोना वायरस संक्रमण के लक्षण दिखते ही चंद्रप्रभा ने उसे तत्काल चित्तौड़ा कोविड केयर फैसेलिटी में भिजवा दिया। साथ ही सुरेश के परिवार और उसके संपर्क में रहे अन्य प्रवासी मजदूरों की भी कोविड-19 जांच की जिम्मेदारी निभाई। इसके चलते सुरेश के कारण कोरोना संक्रमण दूसरों में नहीं फैल पाया।
यह एक महज उदाहरण है कि कैसे पाकिस्तान से ज्यादा आबादी वाले उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमण पर काबू पाने में आशा कार्यकत्रियों ने अहम भूमिका निभाई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि उत्तर प्रदेश में गांव स्तर पर काम करने वाली 1.6 लाख सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (आशा) ने कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान लौटे 30.43 लाख प्रवासी मजदूरों की पहचान करने में अहम भूमिका अदा दी। साथ ही पहचान के बाद इन सभी के स्वास्थ्य पर निगरानी रखने की अहम जिम्मेदारी भी निभाई और कोरोना संक्रमण के खतरे को सीमित कर दिया।
मंत्रालय ने यह भी बताया कि आशा कार्यकर्ताओं ने संक्रमितों के संपर्क में आने वालों की कांटेक्ट ट्रेसिंग और कम्युनिटी सर्विलांस करने में भी राज्य सरकार की अहम मदद की है। मंत्रालय ने कहा, आशाओं ने पहले चरण में 11.24 लाख प्रवासी मजदूरों को चिह्नित किया और दूसरे चरण में 19.19 लाख प्रवासियों की पहचान की। इसके अलावा उन्होंने संक्रमण के लक्षण वाले 7965 लोगों की पहचान कराने और उनके स्वास्थ्य की नियमित निगरानी करने की भी जिम्मेदारी निभाई।
मंत्रालय के मुताबिक, आशा बहनों ने 2232 प्रवासी मजदूरों के जांच सैंपल भी उपलब्ध कराए, जिनमें 203 पॉजिटिव मिले। दरअसल देश के शहरी और ग्रामीण इलाकों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से करीब 10 लाख आशा कार्यकर्ता तैनात हैं, जिनमें से 1.67 लाख कार्यकर्ता अकेले उत्तर प्रदेश में हैं।
इस कारण अहम है यूपी में किया गया काम
बता दें कि देश की आबादी में करीब 17 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण के महज 22828 मामले मिले हैं, जो राष्ट्रीय स्तर पर 566840 संक्रमितों के आंकड़े का महज 4 फीसदी हिस्सा है। संक्रमण को काबू करने में आशाओं की तरफ से जुटाई गई जानकारी से बेहद मदद मिली है।