2007 में हैदराबाद की मक्का मस्जिद में हुए ब्लास्ट केस में आरोपी बनाए गए असीमानंद को कोर्ट ने जमानत दे दी है। इससे पहले असीमानंद का नाम देश के तीन प्रमुख ब्लास्ट केस में भी सामने आया था। वहीं अजमेर ब्लास्ट केस में भी असीमानंद को जमानत मिल चुकी है। 18 मई, 2007 को हैदराबाद के पुराने इलाके में स्थित मक्का मस्जिद के पास जुमे की नमाज के दौरान हुए जोरदार विस्फोट में 16 लोगों की मौत हो गई थी। धमाका दोपहर डेढ़ बजे करीब हुआ था।
अजमेर ब्लास्ट केस में हाईकोर्ट जाएंगे परिवादी
अजमेर दरगाह में हुए बम ब्लास्ट मामले में एनआईए की विशेष अदालत के फैसले को लेकर परिवादी खादिम सैयद सरवर चिश्ती नाखुश हैं। वे इस मामले में बनाए गए मुख्य आरोपी स्वामी असीमानन्द के बरी होने के फैसले को चुनौती देने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहे हैं। एनआईए की विशेष अदालत ने 8 मार्च, 2017 को असीमानन्द को बरी कर दिया था।
अंजुमन सैयद जादगान के पूर्व सचिव व खादिम सैयद सरवर चिश्ती ने फैसले के बाद बड़ी देग में पत्रकारों से कहा कि उन्होंने वर्ष 2007 में दरगाह में हुए बम ब्लास्ट मामले की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। उन्होंने कहा कि फैसले से सभी खादिम समुदाय और मुस्लिम वर्ग व्यथित है। इस मामले में स्वामी असीमानन्द सहित मुख्य आरोपियों को बरी कर दिया है, जबकि वर्ष 2011 तक उनके खिलाफ सभी सबूत सामने आए थे। चिश्ती ने कहा कि सत्ता बदलते ही एनआईए की जांच की दिशा भी बदल गई।
उन्होंने कहा कि असीमानन्द का नाम अजमेर ब्लास्ट, मालेगांव ब्लास्ट व समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट में भी आ चुका है। उन्होंने कहा कि जब याकूब मेनन को आतंकवादी होने के कारण फांसी की सजा दी जा सकती है, तो फिर जिन दो आरोपियों को दोषी करार दिया गया उन्हें आजीवन कारावास की सजा से ही क्यों दंडित किया गया।