नाबालिग से दुराचार के आरोपी आसाराम को लेकर 25 अप्रैल को आने वाले फैसले से राजस्थान सरकार खासी डरी हुई है। राजस्थान सरकार को डर है कि फैसले के दिन आसाराम के समर्थक राम-रहीम के समर्थकों की तरह हिंसा पर न उतर जाएं। सरकार ने हाईकोर्ट से आग्रह किया है कि फैसले के दिन आसाराम को जोधपुर की विशेष एससी-एसटी कोर्ट में तलब करने के बजाय जेल में ही फैसला सुना दिया जाए। हाईकोर्ट ने आसाराम के वकील को नोटिस भेजकर जवाब तलब किया है।
जानकारी के अनुसार राजस्थान सरकार ने हाईकोर्ट से कहा है कि आसाराम के समर्थकों ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कई बार तनाव फैलाया है और इन्हें काबू में करने के लिए कई बार पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा है। सुनवाई के दौरान बने हालातों में सरकार को आशंका है कि फैसले के दिन देशभर से हजारों की संख्या में
आसाराम के समर्थक जोधपुर पहुंचेंगे, इससे स्थिति बिगड़ सकती है। ऐसे हालातों से बचते के लिए राजस्थान सरकार ने हाईकोर्ट से गुहार लगाई है कि आसाराम को जेल में ही फैसला सुनाने की व्यवस्था की जाए।
हाईकोर्ट के न्यायाधीश गोपालकृष्ण व्यास और न्यायाधीश रामकृष्ण सिंह की खंडपीठ ने आसाराम के वकील महेश बोड़ा से लिखित में मंगलवार तक जवाब पेश करने को कहा। महेश बोड़ा ने कहा है कि जब सुनवाई नियमित कोर्ट में हो सकती है तो फैसला भी वहीं पर सुनाया जा सकता है। सिर्फ फैसले के लिए कोर्ट को जेल में शिफ्ट नहीं किया जा सकता है।