फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Owaisi: 'वक्फ की एक जमीन मोदी सरकार हमसे नहीं छीन सकेगी..', कर्नाटक की रैली में बोले असदुद्दीन ओवैसी

Wed, 25 Jun 2025 09:05 AM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायचूर

सार

ओवैसी ने कहा कि 'हम रायचूर के हिंदू भाइयों को संदेश देना चाहते हैं कि आपको एंडोवमेंट बोर्ड में सिर्फ हिंदू सदस्य बन सकता है तो मुसलमानों को वक्फ में कैसे गैर मुस्लिम सदस्य बनेगा?'
विज्ञापन
असदुद्दीन ओवैसी - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर वक्फ कानून को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी या मोदी सरकार हमसे वक्फ की एक जमीन नहीं छीन सकेंगे। कर्नाटक का रायचूर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने ये बात कही। 
विज्ञापन


क्या बोले ओवैसी
हैदराबाद सीट से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि 'जो लोग ये समझ रहे कि मुसलमानों को ये कानून बनाकर डराया जाएगा। याद रखो कि पीएम मोदी या मोदी सरकार वक्फ की एक जमीन हमसे नहीं छीन सकेगी। ये कानून काला है। ये संविधान के अनुच्छेद 14,15,25,26 और 29 के खिलाफ है। जो चैप्टर तीन का अधिकार है, उसके खिलाफ है।' ओवैसी ने कहा कि 'हम रायचूर के हिंदू भाइयों को संदेश देना चाहते हैं कि आपको एंडोवमेंट बोर्ड में सिर्फ हिंदू सदस्य बन सकता है तो मुसलमानों को वक्फ में कैसे गैर मुस्लिम सदस्य बनेगा?'
 
ये भी पढ़ें- Emergency@50: इंदिरा सरकार ने कब बनाई आपातकाल की योजना, जानें तब कैसे थे हिंदुस्तान के हालात
विज्ञापन
विज्ञापन


वक्फ कानून का लगातार विरोध कर रहे ओवैसी
एआईएमआईएम प्रमुख ने वक्फ कानून में पांच साल के मुसलमान के प्रावधान पर भी सवाल उठाए और कहा कि 'ये पांच साल के मुसलमान का क्या कानून है? ये पांच साल का नियम कहां से लगाया गया।' असदुद्दीन ओवैसी वक्फ संशोधन कानून का विरोध कर रहे हैं। ओवैसी का आरोप है कि वक्फ कानून से वक्फ बोर्ड कमजोर होगा। यह कानून असंवैधानिक है। वहीं सरकार का कहना है कि वक्फ कानून में जो संशोधन किए गए हैं, उनकी मंशा संपत्ति के प्रबंधन को धर्मनिरपेक्ष बनाए रखना है। यह कानून संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 में मिली धार्मिक आजादी का उल्लंघन नहीं करता है। वक्फ कानून 2 अप्रैल को लोकसभा और 3 अप्रैल को राज्यसभा से पारित हुआ था। इसके बाद 5 अप्रैल को राष्ट्रपति ने इसे अपनी मंजूरी दी। जिसके बाद यह कानून बना। 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें