ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार और अपने आलोचकों पर पलटवार किया है। उन्होंने राज्य की आर्थिक रिपोर्ट और सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना के आंकड़ों का हवाला देते हुए बीदर और मुस्लिम समुदाय के पिछड़ेपन का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि क्षेत्र में विकास की कमी के लिए क्या उन्हें भी जिम्मेदार ठहराया जाएगा?
बीदर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए हैदराबाद के सांसद ओवैसी ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि बीदर का गरीबी सूचकांक 11.25 है, जबकि कर्नाटक का औसत 7.58 है। उन्होंने साक्षरता दर और प्रति व्यक्ति आय में अंतर का भी जिक्र किया।
ओवैसी बोले- मुस्लिम समुदाय सबसे पिछड़ा
ओवैसी ने कहा, "बागदल में साक्षरता दर 65 प्रतिशत है, जबकि पूरे कर्नाटक में यह 75 प्रतिशत है। क्या इसके लिए भी मैं जिम्मेदार हूं? कर्नाटक के आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, बागदल में प्रति व्यक्ति आय 1.75 लाख रुपये है, जबकि पूरे राज्य में यह 3.75 लाख रुपये है। इसके लिए कौन जिम्मेदार है?"
सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़ों का हवाला देते हुए ओवैसी ने कहा कि सिद्धारमैया के पिछले कार्यकाल में कर्नाटक में सामाजिक, शैक्षणिक और जाति जनगणना कराई गई थी। इस रिपोर्ट में मुस्लिम समुदाय की आर्थिक स्थिति को बेहद पिछड़ा बताया गया है।
'आजीविका के मामले में 32वें स्थान पर मुसलमान'
उन्होंने कहा, "रिपोर्ट में आजीविका के मामले में मुसलमानों को 32वें स्थान पर रखा गया है, जो सबसे निचला स्तर है। करीब 27 प्रतिशत मुसलमान इस श्रेणी में आते हैं। आजीविका के मामले में मुस्लिम समुदाय सबसे पिछड़ा है।" ओवैसी ने उत्तरी कर्नाटक के क्षेत्रीय असंतुलन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बीदर जिले का गरीबी सूचकांक 11.25 है, जबकि पूरे राज्य का औसत 7.58 है। उन्होंने क्षेत्र में सरकारी योजनाओं के लाभ और विकास कार्यों के लिए आवंटित धन के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए।
ओवैसी की ये टिप्पणियां कर्नाटक में सामाजिक और शैक्षणिक सर्वेक्षण यानी जाति जनगणना के निष्कर्षों और कल्याण कर्नाटक क्षेत्र के विकास को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच आई हैं।
जनगणना 2027 के दूसरे चरण का कार्यक्रम जारी
इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को जनगणना 2027 के दूसरे चरण का कार्यक्रम अधिसूचित किया। इसके तहत जनसंख्या गणना 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 तक होगी। इसके बाद एक से पांच मार्च तक संशोधन का चरण चलेगा।
मंत्रालय के मुताबिक, यह प्रक्रिया मणिपुर को छोड़कर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में होगी। मणिपुर में जनगणना की तारीखों का फैसला बाद में किया जाएगा। इसके अलावा गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड और लद्दाख को भी इस कार्यक्रम से बाहर रखा गया है। हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के बर्फबारी वाले गैर-समकालिक क्षेत्रों में भी इस दौरान जनगणना नहीं होगी।
मंत्रालय ने घर-घर जाकर जनसंख्या गणना शुरू होने से पहले 10 से 24 जनवरी 2027 तक स्व-गणना का विकल्प भी दिया है। जनगणना के लिए संदर्भ तिथि एक मार्च 2027 को रात 12 बजे तय की गई है। गृह मंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया है कि जनगणना अधिनियम, 1948 और जनगणना नियम, 1990 के प्रावधानों के तहत यह कार्यक्रम घोषित किया गया है।