जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला से जुड़े विवाद के कारण देश के सेवानिवृत्त प्रधान न्यायाधीश (CJI) टीएस ठाकुर ने कहा है कि वे रॉ के पूर्व प्रमुख एएस दुलत की नई किताब का विमोचन नहीं करेंगे। पूर्व सीजेआई ने राजनीतिक विवाद का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने पुस्तक विमोचन समारोह में शामिल न होने का फैसला लिया है। गौरतलब है कि दुलत की नई किताब- 'द चीफ मिनिस्टर एंड द स्पाई' का विमोचन आज ही किया जाना था। पुस्तक के लोकार्पण से एक दिन पहले जम्मू-कश्मीर के वर्तमान मुख्यमंत्री और फारूक अब्दुल्ला के बेटे उमर अब्दुल्ला ने कहा था कि उनके पिता पुस्तक विमोचन समारोह में शामिल नहीं होंगे।
'द चीफ मिनिस्टर एंड द स्पाई' का विमोचन आज ही किया जाना था
पूर्व सीजेआई ने राजनीतिक विवाद का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने पुस्तक विमोचन समारोह में शामिल न होने का फैसला लिया है। गौरतलब है कि दुलत की नई किताब- 'द चीफ मिनिस्टर एंड द स्पाई' का विमोचन आज ही किया जाना था। पुस्तक के लोकार्पण से एक दिन पहले जम्मू-कश्मीर के वर्तमान मुख्यमंत्री और फारूक अब्दुल्ला के बेटे उमर अब्दुल्ला ने कहा था कि उनके पिता पुस्तक विमोचन समारोह में शामिल नहीं होंगे।
पूर्व सीजेआई ने अपनी सफाई में क्या कहा?
दुलत का निमंत्रण स्वीकार कर चुके पूर्व सीजेआई ठाकुर ने उन्हें जवाब दिया और कहा, बुधवार से ही प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में आपकी किताब के कुछ हिस्सों पर राजनीतिक तूफान उठते देखा है...। आप फारूक अब्दुल्ला को अपना मित्र मानते हैं, जिन्होंने खुद भी किताब के अंशों को सार्वजनिक रूप से अस्वीकार कर दिया है। बकौल ठाकुर, 'ऐसे हालात में यह विवाद और इसके सियासी पहलू मेरे लिए शर्मिंदगी का कारण बनेंगे। अब्दुल्ला परिवार के साथ लंबे और सौहार्दपूर्ण संबंधों के कारण वे विमोचन से बचना चाहेंगे। वे एक गैर-राजनीतिक शख्स होने के नाते ऐसी किताब का प्रचार या समर्थन करते नहीं दिखना चाहते, जिसे खुद वही अस्वीकार कर रहा है, जिसके बारे में किताब लिखी गई है।'
पूर्व मुख्यमंत्री ने दुलत से माफी भी मांगी
पूर्व सीजेआई ठाकुर ने खेद प्रकट करते हुए दुलत से माफी भी मांगी। उन्होंने कहा, 'मैं जानता हूं कि पुस्तक विमोचन की पूर्व संध्या पर कार्यक्रम में शामिल नहीं होने के फैसले से आपको असुविधा होगी। आप किसी अन्य की तलाश करने को बाध्य होंगे। आपको या किताब के प्रकाशक को भी असुविधाएं होंगी लेकिन मेरी वर्तमान स्थिति को देखते हुए मुझे माफ करिएगा।'
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दुलत की किताब आने के बाद विवाद
पूर्व रॉ चीफ एएस दुलत की नई किताब को लेकर दावा किया गया है कि उन्होंने इसमें फारूक अब्दुल्ला से जुड़े ऐसे प्रसंग का उल्लेख किया है, जो संवेदनशील है। दुलत के मुताबिक फारूक अब्दुल्ला ने निजी रूप से अनुच्छेद 370 हटाने का समर्थन किया था। विवाद होने पर खुद एएस दुलत ने कहा- 'मुझे पूरी तरह से गलत समझा गया है। ऐसा कुछ भी नहीं लिखा गया है। मेरी किताब आलोचना नहीं, बल्कि फारूक साहब की सराहना है।' वहीं इस पर प्रतिक्रिया देते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने भी किताब को लेकर गलत जानकारी और तथ्यों में गड़बड़ी की बात कही और कहा- एक दोस्त इस तरह नहीं लिखता। उन्होंने दुलत के दावे का खंडन करते हुए कहा था कि यह पुस्तक को लोकप्रिय बनाने के लिए अपनाया गया सस्ता हथकंडा है।
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क्या लिखा है किताब में जिस पर हो रहा है विवाद
गौरतलब है कि पूर्व रॉ चीफ एएस दुलत ने अपनी नई किताब में जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला से जुड़े जिस प्रसंग का जिक्र किया है, वह देश के संविधान के अनुच्छेद 370 से जुड़ा है। बाद में विवाद होने पर दुलत ने कहा कि उनके बयान को गलत समझा गया। उन्होंने अपनी किताब में अब्दुल्ला की सराहना की है। पूर्व IPS अधिकारी एएस दुलत ने इंटेलिजेंस ब्यूरो और रॉ दोनों में सेवाएं दे चुके हैं। 1990 के दशक में उन्होंने कश्मीर ग्रुप का नेतृत्व किया। रिटायरमेंट के बाद जनवरी 2001 से मई 2004 तक वे प्रधानमंत्री कार्यालय में कश्मीर मामलों के सलाहकार रहे।
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