भारत और यूरोपीय संघ में विविधता के मुद्दे पर तुलना करते हुए नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने शनिवार को कहा कि एक संगठित इकाई के तौर पर विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत यूरोपीय संघ की तुलना में बेहतर स्थिति में है। उन्होंने कहा कि आने वाले दशकों के दौरान भारत में उच्च वृद्धि दर देखा जाना अवश्यंभावी है
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के एक समारोह में जाने माने अर्थशास्त्री पनगढ़िया ने कहा कि भारी विविधता और विभिन्न परंपराओं और संस्कृति के बावजूद भारत एक संकठित इकाई रहा है। वह अक्सर भारत को ‘हंगामे वाला लोकतंत्र’ कहे जाने से जुड़े सवाल का जवाब दे रहे थे। अर्थशास्त्री जगदीश भगवती का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सिंगापुर के पहले प्रधानमंत्री ली कुआन यू के भारत को ‘हंगामे वाला लोकतंत्र’ कहे जाने वाले बयान पर भगवती ने कहा था कि ‘आप हंगामा सुनते हैं और मैं संगीत सुनता हूं।’
पनगढ़िया ने कहा, ‘इसी से सारी बातें साफ हो जाती हैं। जरा इसके बारे में सोचिए कि भारत से काफी कम विविधता वाले यूरोपियन आज एक राज्य बनने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। एक यूरोप के तरफ उठाए गए कदम में कई सारी कठिनाइयां हैं। एकल मुद्रा संघ के तौर पर भी इस बात की आशंका है कि ग्रीस इस संघ से अलग हो सकता है और कल को स्पेन इससे अलग हो सकता है।’