दलित समाज के लोगों के बीच अरविंद केजरीवाल के लिए पैदा हुआ सम्मान आश्चर्यचकित कर देता है। अरविंद केजरीवाल के शपथ ग्रहण समारोह में गोकलपुरी (सुरक्षित) विधानसभा सीट से पहुंचे उदयवीर (35 वर्ष) दलित समाज से हैं। वे अपने चारों ओर झाड़ू के तिनके बिखेरे हुए हैं। हर तिनके पर अरविंद केजरीवाल की छोटी-छोटी फोटो लगी हुई हैं।
अरविंद केजरीवाल की फोटो से मयूर पंख सा आभास देते हुए नाचते उदयवीर कहते हैं कि वे 'अरविंद केजरीवाल जी' से बहुत प्रभावित हैं और उन्हें अपना समर्थन देने यहां आए हैं। उन्हीं की तरह त्रिलोकपुरी से आए राजेंद्र गौतम कहते हैं कि अरविंद केजरीवाल ने उनके समाज को सम्मान दिया है जो आज तक किसी दूसरे दल ने नहीं दिया।
नगर निगम में झाड़ू लगाने वाले सफाई कर्मचारी का बेटा अगर विधायक बनता है तो यह केवल अरविंद केजरीवाल के कारण संभव हुआ है। जाहिर है कि वे 'केजरीवाल जी' को अपना समर्थन देने के लिए यहां (रामलीला मैदान) आए हैं।
एक अन्य दलित युवक अशोक कुमार का कहना है कि अरविंद केजरीवाल के रोड शो के दौरान एक महिला की उनसे हाथ जोड़े तस्वीर बहुत वायरल हुई थी। विपक्ष इसे भले ही प्रचार का हथकंडा बताए, लेकिन अगर आप अरविंद केजरीवाल के रोड शो में गए हैं तो आपको एहसास हो जाता है कि यह लगाव बनावटी नहीं था।
अरविंद केजरीवाल ने यह सम्मान किसी जाति के होने के कारण नहीं, बल्कि अपने काम की वजह से हासिल किया है जो उन्होंने सबके लिए किया है। कई विधानसभा क्षेत्रों में दलित समाज के लोग आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार का नाम तक नहीं जानते थे। उन्हें केवल यह पता होता था कि उन्हें आम आदमी पार्टी को समर्थन देना है, और इसके लिए झाड़ू पर बटन दबाना है।
राजनीतिक चिंतकों का कहना है कि इस प्रकार की सोच केवल मायावती की राजनीति के दौरान देखने को मिली थी जब लोगों को उम्मीदवार का नाम नहीं याद रहता था, बल्कि उन्हें केवल बसपा, मायावती और हाथी का निशान याद रहता था। 2014 के आम चुनाव में नरेंद्र मोदी के लिए भी इसी तरह की स्थिति देखी गई थी। इसके बाद अब अरविंद केजरीवाल ने इस तरह की सफलता हासिल की है।