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अरुणाचल: प्रथम गांव काहो में विकास को मिली रफ्तार, लोग बोले- पीएम मोदी बेहद ताकतवर, अब हमें चीन से क्या डरना

सार

अंजॉ जिले के प्रथम गांव काहो के गांवबूढ़ा (सरपंच) खिति मियोर कहते हैं,  जब से भारत सरकार ने देश के सीमावर्ती गांवों में वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम चलाया है, तबसे हमारे गांव काहो, जो प्रथम गांव है का विकास होने लगा है। मोदी सरकार के आने के बाद से सब कुछ बदल गया है। अब 24 घंटे बिजली है, सड़कें बन रही हैं, मोबाइल सेवा शुरू हो गई है। हर तरफ विकास की बयार बह रही है।
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प्रथम गांव काहो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अंजॉ डर, किस बात का डर...हमें अब किसी से डरने की जरूरत नहीं है। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेहद ताकतवर हैं, फिर चीन हो या कोई और देश, डरने की कोई बात ही नहीं है। अब चप्पे-चप्पे पर भारतीय सेना का पहरा है। हम चैन की नींद सोते हैं। पहले की बात और थी, अब हालात बदल गए हैं। यह बात अब पूरी दुनिया को समझ लेनी चाहिए।

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ये शब्द हैं अरुणाचल प्रदेश के अंजॉ जिले के प्रथम गांव काहो के गांवबूढ़ा (सरपंच) खिति मियोर के, जो दूर पहाड़ पर भारतीय सेना की ओर इशारा करते हैं और कहते हैं...देख रहे हैं हमारी ताकत। मियोर कहते हैं, अब कोई चिंता नहीं है। हमने भी हर तरह की ट्रेनिंग ले रखी है। जरूरत पड़ी तो भारतीय सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर दुश्मनों पर टूट पड़ेंगे। हमारे प्रधानमंत्री अब किसी को छोड़ने वाले नहीं हैं।

अब 24 घंटे मिल रही बिजली, बन रहीं सड़कें
मियोर कहते हैं,  जब से भारत सरकार ने देश के सीमावर्ती गांवों में वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम चलाया है, तबसे हमारे गांव काहो, जो प्रथम गांव है का विकास होने लगा है। मोदी सरकार के आने के बाद से सब कुछ बदल गया है। अब 24 घंटे बिजली है, सड़कें बन रही हैं, मोबाइल सेवा शुरू हो गई है। हर तरफ विकास की बयार बह रही है। गांव में स्कूल बना, पुस्तकालय बना है। बच्चों के खेलने के लिए सुविधाएं मिल रही हैं। स्वास्थ केंद्र बना। अब हाईवे आ रहा है। क्षेत्र का बड़ी तेजी से विकास हो रहा है। वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम से पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है। गांव में होम स्टे बन रहे हैं। पर्यटकों की संख्या बढ़ने लगी है। सरकार होम स्टे वालों को ट्रेनिंग दे रही है। इससे गांव के युवाओं को गांव में ही रोगजार मिल रहा है।
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विकास की कहानी प्रेम की जुबानी
जिस गांव में कुछ वर्ष पहले तक बिजली और कुछ माह पहले तक मोबाइल नेटवर्क नहीं था, वहां बैठकर आज प्रेम टैबलेट पर काम कर रहे हैं। प्रेम कहते हैं, मुझे देखकर ही अंदाजा लगा सकते है कि पिछले कुछ वर्षों में गांव का विकास कहां से कहां पहुंच गया है।

अब अंधेरे में खाना नहीं बनाना पड़ता
गांव में एक दुकान चलाने वाली रंगमंग मियोर कहती हैं, बिजली होने से बच्चों की पढ़ाई आसान हो गई है। हमको रात में अंधेरे में खाना नहीं बनाना पड़ता। मोबाइल नेटवर्क से विकास को चार चांद लग गए हैं। पेमेंट करने में अब कोई परेशानी नहीं होती। पहले से काम ज्यादा हो रहा है। अमदनी में भी बढ़ोतरी हुई है।

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