अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर स्थित राजभवन में 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' की भावना के अनुरूप पश्चिम बंगाल का स्थापना दिवस उत्साह, रंग और सांस्कृतिक विविधता के साथ मनाया गया। इस आयोजन में अरुणाचल प्रदेश में रहने वाले बंगाली और गोरखा समुदायों ने भाग लिया और पश्चिम बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन किया। इस मौके पर अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल ने पश्चिम बंगाल के लोगों को उनके राज्य स्थापना दिवस पर शुभकामनाएं दीं और अरुणाचल प्रदेश के विकास में बंगाली और गोरखा समुदायों के लंबे योगदान की सराहना की। राज्यपाल ने इस बात पर बल दिया कि पश्चिम बंगाल क्रांतिकारी विचारों और सुधारवादी नेताओं की भूमि रहा है।
राज्यपाल रहे कार्यक्रम के मुख्य अतिथि
अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल केटी परनाइक (सेवानिवृत्त) और राज्य की प्रथम महिला अनघा परनाइक इस अवसर पर मुख्य अतिथि रहे और बंगाली समुदाय के सदस्यों के साथ उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस मौके पर राज्यपाल ने पश्चिम बंगाल के लोगों को राज्य स्थापना दिवस की बधाई दी और बंगाली एवं गोरखा समुदायों को अरुणाचल प्रदेश के सामाजिक और सांस्कृतिक विकास में उनके योगदान के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि इन समुदायों की सांस्कृतिक जीवंतता ने राज्य के सामाजिक ताने-बाने को समृद्ध किया है।
यह भी पढ़ें -
Bengal: पुलिस ने मजूमदार और लंदन में ममता से सवाल पूछने वाले डॉक्टर को हिरासत में लिया, खड़ा हुआ सियासी विवाद
राज्यपाल ने पश्चिम बंगाल को क्रांतिकारी विचारों और समाज सुधारकों की भूमि बताते हुए राजा राम मोहन राय जैसे महापुरुषों के योगदान को याद किया, जिन्होंने सती प्रथा और दहेज प्रथा के खिलाफ आवाज उठाई थी। उन्होंने कहा- कि रामकृष्ण मिशन और विवेकानंद केंद्र विद्यालयों जैसे संस्थानों ने अरुणाचल प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने में अहम भूमिका निभाई है। राज्यपाल ने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन छात्रों को भारत की विविध संस्कृतियों से रूबरू कराते हैं, जिससे उनमें सहानुभूति, समझ और एकता की भावना विकसित होती है।
सांस्कृतिक कार्यक्रम ने सबका मन मोहा
ईटानगर स्थित नृत्यांगन डांस एंड म्यूजिक अकादमी के छात्रों ने बंगाली लोकनृत्य 'आज धानेर खेतें' प्रस्तुत किया, जिसमें ग्रामीण बंगाल की जीवंतता को दर्शाया गया। कवि द्विजेंद्रलाल राय की तरफ से रचित समूह गीत धन-धान्ये पुष्पे भरा प्रस्तुत किया गया, जिसमें प्रकृति और देशभक्ति ने सबको भाव-विभोर कर दिया। 'कदम चला' नाम का गोरखाली नृत्य का प्रदर्शन ल्हामु डोल्मा तमांग, घेंडुन ल्हामु तमांग और श्रुति विश्वकर्मा ने किया, जो गोरखा परंपरा की झलक दिखाई दी। पीएम श्री अरुणोदय स्कूल के छात्रों ने अरुणाचली लोक नृत्य प्रस्तुत कर समारोह में स्थानीय संस्कृति का सुंदर समावेश किया।
इस दौरान सबसे भावुक पल रहा पारंपरिक बंगाली युगल नृत्य 'सोहाग चांद बोधोनी', जिसे अरुणाचल की दो आदिवासी छात्राओं — वीकेवी ईटानगर की कक्षा 8 की छात्रा टेची आजुम और केवी ईटानगर की कक्षा 11 की छात्रा टार दाई ने प्रस्तुत किया। यह नृत्य बंगाली विवाह परंपरा पर आधारित था और सांस्कृतिक समरसता का सुंदर उदाहरण बना।
यह भी पढ़ें -
Manipur: महिला की मौत के बाद आदिवासी संगठन के बंद से सामान्य जनजीवन प्रभावित; ITLF ने की स्वतंत्र जांच की मांग
राज्यपाल और प्रथम महिला ने प्रतिभागियों के लिए हाई-टी की मेजबानी की और बंगाली व गोरखा समुदाय के लोगों से आत्मीय बातचीत की। उन्होंने इन समुदायों द्वारा अपनी सांस्कृतिक धरोहर को बनाए रखने के प्रयासों की सराहना की। यह आयोजन भारत की 'विविधता में एकता' की भावना का सुंदर प्रतीक बना और राज्यपाल की उस सोच को उजागर किया जिसमें बच्चों और युवाओं के बीच अंतर-सांस्कृतिक समझ को एक समावेशी और सामंजस्यपूर्ण समाज की नींव माना गया है।