प्रसिद्ध वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि इस कंपनी को सौदे के महज पांच महीने पहले ही बनाया गया था। इससे साफ जाहिर होता है कि कंपनी को बनाया ही सिर्फ इस सौदे के लिए गया था।
उन्होंने कहा कि सरकार प्रति विमान एक हजार करोड़ रुपये की अधिक कीमत को इस तरह न्यायोचित ठहराने की कोशिश कर रही है कि राफेल विमानों की उन्नत तकनीकी का सौदा किया गया और विमानों में मिसाइल और अन्य उपकरण लगाये जाएंगे। भूषण के मुताबिक सरकार के इस बयान में ही घोटाले की बू आती है क्योंकि पहले करार में ही यह पूरी सुविधाएं मौजूद होने की बात कही गई थी।
उन्होंने कहा कि सरकार कीमतों के बारे में भी खुलकर कोई जानकारी नहीं देना चाहती और कहती है कि फ्रांस और भारत सरकार के बीच हुए सेक्रेसी एक्ट की वजह से वह विमानों की कीमतों का खुलासा नहीं कर सकती।
भूषण के मुताबिक यह सरासर बचकानी बात है क्योंकि सेक्रेसी का मामला तकनीकी पहलू से तो संबंधित हो सकता है लेकिन खरीद की कीमत बताने में किसी तरह का सेक्रेसी एक्ट नहीं होता। उन्होंने कहा कि इसकी आड़ में सरकार अपने घोटाले को छिपाना चाहती है। उन्होंने इसे सीधे गंभीर अपराध करार दिया।
पूर्व रक्षामंत्री यशवंत सिंहा ने कहा कि सरकार पर गंभीर आरोप हैं और अब सीएजी के द्वारा ही इस मामले की जांच की जानी चाहिये। उन्होंने कहा कि सीएजी इस मामले की जांच की रिपोर्ट तीन माह के अंदर जनता के सामने रखें जिससे मामले की हकीकत का पता चल सके।