पूर्व केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता रहे अरुण जेटली के लिए राजनीतिक हलकों में अनौपचारिक तौर पर माना जाता था कि वह ‘पढ़े लिखे विद्वान मंत्री’ हैं। पिछले तीन दशक से अधिक समय तक अपनी तमाम तरह की काबिलियत के चलते जेटली लगभग हमेशा सत्ता तंत्र के पसंदीदा लोगों में रहे, सरकार चाहे जिसकी भी रही हो।
अति शिष्ट, विनम्र और राजनीतिक तौर पर उत्कृष्ट रणनीतिकार रहे जेटली भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए मुख्य संकटमोचक थे जिनकी चार दशक की शानदार राजनीतिक पारी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते समय से पहले समाप्त हो गई।
खराब सेहत के चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दूसरी बार बनी सरकार से खुद को बाहर रखने वाले 66 वर्षीय जेटली का शनिवार को एम्स में निधन हो गया। सांस लेने में तकलीफ और बेचैनी की शिकायत के बाद उन्हें यहां भर्ती कराया गया था।
पीएम मोदी का असली चाणक्य मानते थे लोग
सर्वसम्मति बनाने में महारत प्राप्त जेटली को कुछ लोग मोदी का ऑरिजनल ‘चाणक्य’ भी मानते थे जो 2002 से मोदी के लिए मुख्य तारणहार साबित होते रहे। मोदी तब मुख्यमंत्री थे और उनपर गुजरात दंगे के काले बादल मंडरा रहे थे। जेटली न सिर्फ मोदी, बल्कि अमित शाह के लिए भी उस वक्त में मददगार साबित हुए थे जब उन्हें गुजरात से बाहर कर दिया गया था।
शाह को उस वक्त अक्सर जेटली के कैलाश कॉलोनी दफ्तर में देखा जाता था और दोनों हफ्ते में कई बार साथ भोजन करते देखे जाते थे। मोदी को 2014 में भाजपा के प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने की औपचारिक घोषणा से पहले के कुछ महीनों में, जेटली ने राजनाथ सिंह, शिवराज सिंह चौहान और नितिन गडकरी को साथ लाने के लिए पर्दे के पीछे बहुत चौकस रहकर काम किया।
पीएम मोदी ने कहा था अनमोल हीरा
प्रशिक्षण से वकील रहे जेटली अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री थे और जब मोदी प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने अरुण शौरी और सुब्रमण्यम स्वामी की संभावनाओं को अनदेखा करते हुए उन्हें वित्त मंत्री के सभी महत्त्वपूर्ण कार्य सौंपे। मोदी एक बार जेटली को अनमोल हीरा भी बता चुके हैं। यहां तक कि जेटली को रक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया था जब मनोहर पर्रिकर की सेहत बिगड़ी थी।
सत्ता संचालन के दांव पेंच से भली-भांति परिचित जेटली 1990 के दशक के अंतिम सालों के बाद से नई दिल्ली में वह मोदी के भरोसेमंद बन चुके थे और बीते कुछ सालों में 2002 दंगों के बाद अदालती मुश्किलों को हल करने वाले कानूनी दिमाग से आगे बढ़कर वह उनके मुख्य योद्धा, सूचना प्रदाता और उनका पक्ष रखने वाले बन चुके थे।
बहुआयामी अनुभव और अपनी कुशाग्रता के साथ जेटली मोदी सरकार के पहले कार्यकाल 2014 से 2019 तक उनके साथ थे। सरकार की उपलब्धियों को गिनाने या विवादित नीतियों के बचाव में उतरने की बात हो या कांग्रेस पर आक्रामक हमला बोलने या 2019 के चुनाव को स्थिरता या अव्यवस्था के बीच चुनने की परीक्षा बताना हो, जेटली समेत कुछ ही लोग इस संबंध में प्रभावी नजर आए।