स्वास्थ्य लाभ ले रहे केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने स्विस बैंकों में भारतीयों के धन में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी के मामले को विपक्ष द्वारा मुद्दा बनाए जाने पर आलोचना की है। इसी संबंध में केंद्रीय मंत्री ने शुक्रवार को अपने फेसबुक पेज पर एक पोस्ट लिखी है जिसमें उन्होंने बताया कि स्विस बैंकों में जमा ज्यादातर पैसा उन भारतीयों का है, जो अब विदेशों में रह रहे हैं और इस पूरे धन को काला धन नहीं माना जा सकता है।
जेटली ने कहा कि स्विस बैंक अपने यहां जमा धनराशि की जानकारी साझा करने के लिए तैयार नहीं थे, लेकिन वैश्विक दबाव के बाद ऐसा संभव हो पाया है। अब ये जानकारी मांगने वाले देशों को डिटेल देने के लिए राजी हो गए है।
उन्होंने कहा कि जल्द ही जानकारी मिलनी शुरू हो जाएगी। स्विस बैंकों में गैरकानूनी तरीके से रकम जमा करने वाले लोगों को अब कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। स्विस बैंक सही समय आने पर खुलासा करने को तैयार है और इसीलिए कर चोरी करने वालों के लिए यह सुरक्षित जगह नहीं है।
उल्लेखनीय है कि इसी संबंध में कार्यकारी वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने भी विपक्ष द्वारा मुद्दे को लेकर घेरे जाने के बाद सफाई दी है। गोयल ने कहा है कि वहां जमा सारी रकम काला धन नहीं है, लेकिन साथ ही उन्होंने आश्वस्त किया कि इस मामले में कोई भी दोषी पाया जाएगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड में हुई एक द्विपक्षीय संधि के अनुसार स्विट्जरलैंड 1 जनवरी, 2018 से 31 दिसंबर, 2018 तक के भारतीय के बैंक अकाउंट के आंकड़े उपलब्ध करवाएगा। आंकड़ा प्राप्त होने से पहले कैसे कहा जा सकता है कि वहां के बैंकों में जमा रकम काला धन है या अवैध लेन-देन है।
गोयल ने कहा कि पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के कार्यकाल में लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (एलआरएस) लागू की गई थी, जिसके तहत एक व्यक्ति को हर साल 2.50 लाख डॉलर बाहर भेजने की अनुमति दी गई थी। स्विस बैंकों में भारतीयों की जमा रकम में जो बढ़ोतरी हुई है, उसका 40 फीसदी तो एलआरएस के कारण है।
बता दें कि बृहस्पतिवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक 2017 में स्विस बैंकों में भारतीयों द्वारा जमा रकम 50 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 7,000 करोड़ रुपये हो गई है, जबकि इससे पहले के तीन साल में इसमें गिरावट दर्ज की गई थी।