वित्त मंत्री अरुण जेटली मानते हैं कि 500 और 1000 रुपये के बड़े नोटों का चलन बंद किए जाने से अर्थव्यवस्था पटरी पर लौटी, कर संग्रह बढ़ा और कालेधन पर बड़ी मार पड़ी। उन्होंने कहा कि नोटबंदी के बाद के दो वर्षों में कर संग्रह क्रमश: 15 और 18 फीसदी बढ़ा। उनका यह बयान आरबीआई की ओर से लगभग सभी पुराने नोट वापस आने का खुलासा किए जाने के एक दिन बाद ही आया है।
वित्त मंत्री ने अपने ब्लॉग में लिखा है, ‘एक व्यापक धारणा है कि चूंकि ज्यादातर पुराने नोट वापस आ गए हैं, इसलिए नोटबंदी का उद्देश्य सफल नहीं हो पाया। तो क्या नोटबंदी का एकमात्र मकसद जमा नहीं कराए गए बड़े नोटों को अवैध ठहराना ही था, निश्चित तौर पर नहीं।
नोटबंदी का इससे बड़ा मकसद देश को कर अदायगी के प्रति जिम्मेदार समाज में बदलना, अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना और कालेधन पर चोट करना था। नोटबंदी से पहले के दो वर्षों में कर संग्रह वृद्धि क्रमश: 6.6 फीसदी और 9 फीसदी थी।’
उन्होंने कहा कि मार्च 2014 में आयकर रिटर्न भरने वालों की संख्या 3.8 करोड़ थी जबकि 2017-18 में यह संख्या बढ़कर 6.86 करोड़ हो गई। नोटबंदी का ही असर था कि इसके बाद पहले वर्ष में आईटी रिटर्न 19 फीसदी और दूसरे वर्ष में 25 फीसदी बढ़ा।