संसद से जीएसटी विधेयक पारित कराने के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बृहस्पतिवार को कांग्रेस और वामपंथी पार्टियों समेत कई विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। यह विधेयक अगले हफ्ते राज्यसभा में पेश हो सकता है।
इन पार्टियों ने सरकार से कहा है कि जीएसटी विधेयक लाने से पहले वह राज्यों को आश्वस्त करे कि उनकी वित्तीय जरूरतों का ध्यान रखा जायेगा। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जीएसटी पर विभिन्न दलों से बातचीत हो रही है। उन्होंने बताया कि जेटली ने राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम से संसद के सेंट्रल हॉल में मुलाकात की।
इसके अलावा उन्होंने राज्य सभा में विभिन्न दलों के नेताओं की बैठक बुलाई थी। इस बैठक में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बीजू जनता दल के नेता उपस्थित थे।
माकपा नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि जीएसटी संविधान संशोधन विधेयक संसाधनों के मामले में राज्यों को पंगु बना देगा और आखिर में राज्यों को केन्द्र के समक्ष हाथ फैलाने पड़ेंगे। इससे राज्य पूरी तरह से केन्द्र की दया पर निर्भर हो जायेंगे। उन्होंने कहा कि जीएसटी विधेयक पारित होने पर राज्यों को बिक्री कर, अधिभार और उपकर लगाने जैसे संसाधन जुटाने के अपने अधिकार से हाथ धोना पड़ेगा।
येचुरी ने कहा इस विधेयक के आने के साथ ही राज्य राजस्व जुटाने के अपने एकमात्र अधिकार से भी हाथ धो बैठेंगे। इस विधेयक के पारित होने के बाद राज्य आपात स्थिति में भी कोई उपकर आदि नहीं लगा पायेंगे।
वित्त मंत्री को बैठक में राज्यों ने अपनी इस चिंता से अवगत कराया। जीएसटी विधेयक केवल कर लगाने से जुड़ा है। इसमें केन्द्र-राज्य संबंधों के बारे में कुछ नहीं है। इसलिये विधेयक से बाहर एक प्रस्ताव आना चाहिये जिसमें सरकार को राज्यों को आश्वासन देना चाहिये।
उन्होंने कहा कि उन्हें देखना होगा .कि सरकार इस मुद्दे का किस प्रकार समधान करती है। बैठक के बारे में उन्होंने कहा कि उन्हें केवल सरकार और कांग्रेस के बीच हुये विचार विमर्श के बारे मछें सूचित किया गया। इसमें चर्चा की कोई गुंजाइश नहीं थी।