अक्टूबर माह में महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड में विधानसभा चुनाव हो सकते हैं। अगले वर्ष में फरवरी माह से पहले दिल्ली विधानसभा का चुनाव भी होना तय है। भाजपा इन सभी राज्यों में अनुच्छेद 370 और तीन तलाक को अपना प्रमुख चुनावी एजेंडा बनाने पर विचार कर रही है।
इसके लिए सभी चुनावी राज्यों में जिला से लेकर ब्लॉक स्तर तक मीटिंग आयोजित कर इन फैसलों पर चर्चा करने का कार्यक्रम तय किया गया है। इन कार्यक्रमों में संबंधित राज्यों के नेताओं के साथ-साथ केंद्रीय नेताओं को भी मैदान में उतारा जाएगा। पार्टी के सदस्यता अभियान की समाप्ति के बाद इस कार्यक्रम को शुरु करने की योजना है।
भाजपा के एक नेता के मुताबिक, अनुच्छेद 370 के विवादित प्रावधानों को हटाना हमेशा से पार्टी की प्राथमिकता में रहा है। इसी प्रकार तीन तलाक विरोधी कानून भी भविष्य में देश की बड़ी आबादी को प्रभावित करने वाला है। ऐसे में पार्टी इन मुद्दों पर देश में गंभीर चर्चा चाहती है। पार्टी का मानना है कि तीन तलाक पर मुस्लिम समाज की महिलाओं ने उसका अच्छा समर्थन किया था। वह आगामी चुनावों में यह समर्थन और बढ़ाना चाहती है।
महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड में भाजपा की सरकार है जहां उसे अपनी सत्ता को बनाए रखने की चुनौती है। मौजूदा हालात में विपक्ष बंटा हुआ और कई मायनों में बिखरा हुआ भी है। ऐसे में इन राज्यों में भाजपा की वापसी आसान हो सकती है। हालांकि झारखंड में विपक्ष भाजपा को कुछ चुनौती जरुर दे सकता है।
वहीं दिल्ली में आम आदमी पार्टी सत्ता में है। पिछले चुनाव में 70 में से 67 सीटें जीतकर आने वाली आम आदमी पार्टी इस बार भी अपनी वापसी की संभावनाएं देख रही है। जबकि लोकसभा चुनाव में दिल्ली की सभी सीटें जीतकर भारतीय जनता पार्टी गदगद है और अपनी वापसी की संभावना देख रही है।