जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई हैं। एक याचिका नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता मोहम्मद अकबर लोन ने भी दायर की है। अब कश्मीरी पंडितों के एक समूह ने सुप्रीम कोर्ट में मोहम्मद अकबर लोन की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया है। कश्मीरी पंडित समूह का दावा है कि याचिकाकर्ता मोहम्मद अकबर लोन अलगाववादी ताकतों के समर्थक हैं।
याचिकाकर्ता के पाकिस्तान समर्थक होने का दावा
सुप्रीम कोर्ट में कश्मीरी पंडितों के समूह 'रूट्स इन कश्मीर' ने एक हस्तक्षेप याचिका दायर की है। इस याचिका में दावा किया है कि जम्मू कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता मोहम्मद अकबर लोन घाटी में संचालित होने वाली अलगाववादी ताकतों के समर्थक के तौर पर जाने हैं, जो पाकिस्तान का समर्थन करती हैं। हस्तक्षेप याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता नंबर एक (मोहम्मद अकबर लोन) 2002 से 2018 तक विधानसभा के सदस्य थे और विधानसभा में ही 'पाकिस्तान जिंदाबाद' के नारे लगा चुके हैं।
कश्मीरी पंडितों के संगठन ने लगाए आरोप
याचिका में अपने दावे के समर्थन में कश्मीरी पंडितों के संगठन ने कई मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला दिया है। याचिका में कहा गया है कि मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया था कि अकबर लोन ने ना सिर्फ नारे लगाने की बात स्वीकार की थी बल्कि माफी मांगने से भी इनकार कर दिया था। मोहम्मद अकबर लोन अपने आप को भारतीय कहलाना भी पसंद नहीं करते हैं। अपनी रैलियों के दौरान भी वह पाकिस्तान समर्थित बातें कहते रहे हैं।
याचिका में कहा गया है कि जम्मू कश्मीरी को दो मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों नेशनल कॉन्फ्रेंस की तरफ से मोहम्मद अकबर लोन और पीडीपी की तरफ से पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती ने याचिका दायर की हैं। दोनों ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले को चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट में अकबर लोन की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल पक्ष रख रहे हैं।