भारत-पाक नियंत्रण रेखा... चारों ओर घना अंधेरा। हाथ से हाथ नहीं सूझ रहा। उबड़-खाबड़ पहाड़ और घना जंगल। ऐसे माहौल में सेना के 1800 जवानों को आतंकवादियों का सामना करने का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। घने जंगल में आवाज पहचान कर आतंकियों का पता लगाना और उन्हें धराशायी करने का अनोखा प्रशिक्षण नियंत्रण रेखा से मात्र पांच किलोमीटर दूर दिया जाता है।
जवानों को प्रशिक्षण देने वाले सेना के प्रशिक्षकों का कहना है कि जम्मू कश्मीर, खासकर एलओसी पर जाने से पहले प्रत्येक सैनिक और अफसर का कोर बैटल स्कूल (सीबीएस) में माइंड सेट बदला जाता है, ताकि वे आतंक निरोधी अभियान के दौरान विपरीत परिस्थितियों में आतंकवादियों का बखूबी सामना कर सकें।
सेंस आफ डेंजर (खतरे का आभास) नामक इस कोर्स में सैनिकों को हैंड हैंडल थर्मल इमेजर्स (एचएचटीआई) के उपयोग की विशेष ट्रेनिंग दी जाती है, जिसमें 25 लाख रुपये की कीमत वाले इस आधुनिक डिवाइस से आतंकियों की हरकतों को देखने के बाद उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जा सके।