रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्नब गोस्वामी की मुंबई पुलिस द्वारा गिरफ्तारी को लेकर भाजपा व कांग्रेस आमने सामने आ गए हैं। भाजपा जहां अर्नब के बचाव में खड़ी है और इस मामले को आपातकाल के काले दिनों की याद बता रही है, वहीं कांग्रेस ने केंद्र सरकार व भाजपा के रवैए को भेदभावपूर्ण व अनुचित विलाप बताया है।
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, 'मैं भाजपा व सरकार के पक्षपातपूर्ण व्यवहार से स्तब्ध हूं। इसकी कोई जरूरत नहीं है।' अर्नब का नाम लिए बगैर सुप्रिया ने कहा कि उन्होंने पत्रकारिता का अनादर किया है। वह भाजपा के एक मोर्चे की तरह काम कर रहे हैं और दूसरे लोगों पर आरोप लगाकर उन्हें गालियां दे रहे हैं। यह कैसी पत्रकारिता कर रहे हैं, क्या वे कोई जज या जूरी हैं?'
तब भाजपा मौन क्यों रही?
कांग्रेस प्रवक्ता ने सवाल उठाया कि जब अन्य पत्रकारों पर केस दर्ज किए जा रहे थे तो भाजपा ने चुप्पी क्यों साध रखी थी? सुप्रिया ने उप्र सरकार द्वारा पत्रकार प्रशांत कनौजिया व सुप्रिया शर्मा के ट्वीट्स व रिपोर्टों को लेकर उन पर मुकदमा दर्ज करने का जिक्र कर यह सवाल उठाया। श्रीनेत ने कहा कि यदि कोई निर्दोष है तो उस पर कोई कार्रवाई नहीं होगी, अन्यथा कानून अपना काम करेगा।
भाजपा ने की गिरफ्तारी की निंदा
बता दें कि इससे पहले बुधवार सुबह पत्रकार अर्नब गोस्वामी की गिरफ्तारी के बाद भाजपा नेताओं व केंद्रीय मंत्रियों ने इसकी निंदा करते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी थी। केंद्रीय सूचना व प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने इसे आपातकाल के दिनों की याद करार दिया। वहीं रेल मंत्री पीयूष गोयल ने महाराष्ट्र में सत्ता का दुरुपयोग बताया था।