भारतीय सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल मनोज पांडे ने शुक्रवार को कहा कि हमें क्लासिक युद्ध और शांति स्वभाव को त्यागने और अंतर-एजेंसी सामंजस्य बढ़ाने की जरूरत है।
लेफ्टिनेंट जनरल पांडे ने एक सेमिनार को संबोधित करते हुए कहा, "हमें क्लासिक युद्ध और शांति स्वभाव को त्यागने और अंतर-एजेंसी सामंजस्य बढ़ाने की जरूरत है। वास्तव में, राज्य के सभी अंगों के लिए राष्ट्रीय उद्देश्य की दिशा में एक साथ काम करने की महत्वपूर्ण आवश्यकता, पिछले वर्ष की मुख्य उपलब्धि रही है।"
लेफ्टिनेंट जनरल पांडे ने ऑनलाइन "सूचना और प्रभाव संचालन" की शक्ति का मुकाबला करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "वर्तमान और उभरती प्रवृत्तियों के उदय का मूल्यांकन करने के लिए और धारणा परिवर्तन और नीति सुरक्षा उपायों पर ध्यान देने के साथ, डीपफेक्स और बॉट्स जैसे सूचना और प्रभाव संचालन का मुकाबला करने के उपायों तक पहुंचने के लिए तकनीकी-सामाजिक क्षेत्र यानी सोशल मीडिया को भी संबोधित करने की आवश्यकता है।
उन्होंने आगे कहा कि युद्ध में सफल होने के लिए हमें एक विश्वसनीय निवारक के निर्माण में सक्रिय होना होगा, जिससे अपने रणनीतिक लक्ष्यों को प्राप्त करने और सैन्य वृद्धि को रोकने के लिए विरोधी के प्रयासों को पराजित करना होगा। उन्होंने कहा कि एक बहुआयामी युद्ध लड़ने के लिए क्षमताएं हासिल करने के लिए सेना आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में है। इसमें भविष्य की चुनौतियों और विवादों को भी ध्यान में रखा जा रहा है। सशस्त्र संघर्ष की ओर बढ़ने से रोकने के लिए सेना एक विश्वसनीय और संतुलित बल मुद्रा का निर्माण कर रही है।
लेफ्टिनेंट जनरल मनोज पांडे ने हाल ही में पूर्वी कमान के कमांडर पद छोड़ने के बाद भारतीय सेना के नए उप प्रमुख के रूप में पदभार ग्रहण किया है। पूर्वी कमान चीन, म्यांमार और बांग्लादेश के साथ सीमा साझा करने वाले सभी पूर्वोत्तर राज्यों की देखभाल करता है।
क्या हैं डीपफेक्स और बॉट्स?
ऐसे वीडियो या तस्वीर जहां एक व्यक्ति के चेहरे को कंप्यूटर जनित चेहरे से स्पष्ट रूप से बदल दिया जाता है, उसे डीपफेक्स कहा जाता है। पहले वीडियो में किसी भी व्यक्ति के चेहरे को दूसरे के चेहरे पर लगाने का चलन आया था, लेकिन अब डीपफेक की मदद से हाव-भाव भी बदले जा सकते हैं। इसमें आर्टिफिशल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया जाता है।
डीपफेक वीडियो बनाने के लिए फेकऐप जैसे साइबर टूल्स का इस्तेमाल किया जाता है, जिसकी मदद से कुछ ही घंटों में फेक वीडियो बनाया जा सकता है। इस वीडियो में हाव-भाव भी असली दिखते हैं।
वहीं, बॉट्स एक ऐसा प्रोग्राम है जो कार्य, क्षमता और डिजाइन के आधार पर आकार में भिन्न होते हैं। इसका इस्तेमाल मानव व्यवहार का अनुकरण करते हुए विभिन्न उपयोगी और दुर्भावनापूर्ण कार्यों को करने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किया जा सकता है।