भारतीय सेना इन्फैंट्री (पैदल सेना) में महिलाओं को शामिल करने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन यह फैसला समाज की स्वीकार्यता पर निर्भर करेगा। यह बात जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कही।
जनरल द्विवेदी ने कहा कि मैंने पहले भी कहा है कि महिलाएं काली माता का स्वरूप है उन्हें किसी भी तरह से कमजोर वर्ग के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सेना की सोच पूरी तरह जेंडर न्यूट्रल है और महिलाओं-पुरुषों के बीच किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जाता।
जनरल द्विवेदी ने कहा है कि सेना में एक समान मानक अनिवार्य हैं, लेकिन चिकित्सा और संचालन से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों के कारण इन्हें लागू करना आसान नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं के लिए नए सैन्य रोल खोलने का फैसला उनके प्रदर्शन के आंकड़ों के आधार पर किया जाएगा।
सेना प्रमुख ने कहा कि महिलाओं की भूमिका का विस्तार क्रमिक प्रक्रिया होगी। इसकी शुरुआत सहायक बलों से होगी, इसके बाद लड़ाकू बलों और अंततः स्पेशल फोर्सेज तक रास्ता खुलेगा। उन्होंने इसे क्रमबद्ध और स्वागत योग्य सामाजिक बदलाव बताया।
महिलाओं की संख्या को लेकर सेना प्रमुख ने जानकारी दी कि:
वैश्विक संघर्षों से सबक लेते हुए जनरल द्विवेदी ने कहा कि भारतीय सेना का आधुनिकीकरण अब सर्वोच्च प्राथमिकता बन चुका है। उन्होंने बताया कि:
ऑपरेशन सिंदूर के बाद ड्रोन क्षमताओं को नई गति मिली है। सेना प्रमुख के अनुसार:
उन्होंने बताया कि अब तक 13 भैरव बटालियनें खड़ी की जा चुकी हैं, जो पैदल सेना की घातक टुकड़ियों और स्पेशल फोर्सेज के बीच की खाई को पाटेंगी। इसके अलावा, आर्टिलरी में दिव्यास्त्र बैटरी बनाई गई है, जो डिवीजन कमांडर को ड्रोन और आधुनिक प्रणालियों से लैस समर्थन देगी। काउंटर-ड्रोन सिस्टम के लिए भी नई रेजीमेंट्स तैयार की जा रही हैं।