भारतीय सेना (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) पर पाकिस्तान की नापाक कोशिशों को जवाब देने में व्यस्त में भारत अब चीन को भी गंभीरता से ले रहा है। भारत 4,057 लंबी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर अपनी तैनाती बढ़ाने जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पाक के एलओसी पर नियमों की अनदेखी के बाद भारत चीन की ओर से कोई रिस्क नहीं लेना चाहता है।
सेना लदाख से सटी एलएसी पर अपनी सक्रियता तेज कर रही है। अब भारतीय सेना माउटेन स्ट्राइक कॉर्प्स की मदद से चीन पर नजर बनाए रखने की तैयारी में है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के सेना ने माउंटेन स्ट्राइक कॉर्प्स के दूसरे डिविजन इनफेंट्री डिविजन को सक्रिय करने में जुट गई है।
दरअसल, 72 डिविजन जिसका हेडक्वाटर पठानकोठ में है, को तीन साल के अंदर पूरी तरह से ऑपरेशनल बनाने की तैयारी की जा रही है। ऐसा पहली बार हो रहा है जब भारत चीन के खिलाफ स्ट्राइक कॉर्प्स की तैनाती की तैयारी कर रहा है।
आर्मी ने 17 माउंटेन स्ट्राइक कॉर्प्स की शुरुआत साल 2014 में की थी। इस 17 कॉर्प्स में नए हथियार, एयर डिफेंस और इंजीनियर्स ब्रिगेड्स को लदाख से अरुणाचल प्रदेश तक फैलाया जाएगा। बताया जा रहा है कि 2021 तक चलने वाले इस ऑपरेशन में करीब 90 हजार की सैनिकों होंगे और इस पर करीब 64000 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
इतना ही नहीं चीन की पिपल लिबरेशन आर्मी सेना को टक्कर देने वाले और तोपखाने, बख्तरबंद, एयर डिफेंस, इंजिनियर ब्रिग्रेड से लैस इस 17 कॉर्प्स को लदाख से अरुणाचल प्रदेश तक फैलाया जाएगा। इसमेंअग्नि सीरीज की न्यूक्लिय बैलेस्टिक मिसाइल, फाइटर जेट्स, टैंक्स और सुपर मिसाइल छोड़ने वाला ब्रह्मोस भी शामिल है।