भारत-पाक नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तमाम चौकसी के बावजूद पाकिस्तान से 213 आतंकी जम्मू कश्मीर में घुस आए हैं। सवा तीन साल में आतंकी संगठनों ने घुसपैठ के 644 प्रयास किए। इस दौरान सेना और बीएसफ के जवानों ने घुसपैठ की कोशिश करने वाले 293 आतंकियों की कोशिश पर पानी फेर दिया। सीमा और एलओसी पर लगातार गश्त और आतंकियों पर कार्रवाई के कारण 293 आतंकी खदेड़े गए।
सुरक्षा बलों ने 137 आतंकियों को मार गिराया। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हरिभाई परथीभाई चौधरी का कहना है कि एलओसी और सीमा पर घुसपैठ रोकने के लिए बहुआयामी नीति बनाई गई है। इसके तहत सेना और बीएसफ के जवानों की बहुस्तरीय तैनाती की जा रही है। सीमा पर तारबंदी हुई है और जिन स्थानों पर तारबंदी में अंतराल है वहां नए सिरे से काम चल रहा है। इसके अलावा सुरक्षा बलों को उन्नत उपकरणों और हथियारों मुहैया कराए गए हैं। पाकिस्तान आतंकियों की घुसपैठ के लिए कवर फायरिंग के तहत सीजफायर का उल्लंघन करता रहा है। इससे सीमा और एलओसी पर बसे ग्रामीणों को खासा नुकसान उठाना पड़ता है।
पाकिस्तान पर सीजफायर का उल्लंघन रोकने के लिए लगातार दबाव बनाया गया है लेकिन सीमा पर से गोलाबारी चलती रही है। 2013 में पाकिस्तान ने 148 बार सीजफायर का उल्लंघन किया था। इसी तरह सीजफायर उल्लंघन की 430 घटनाएं साल 2014 में और 253 घटनाएं 2015 में हुईं। सीमा सुरक्षा के पांच जवान शहीद हुए और 20 नागरिकों को भी सीजफायर उल्लंघन के कारण जान गंवानी पड़ी। इस समस्या से निपटने के लिए जम्मू कश्मीर के सीमावर्ती गांवों में 3 करोड़ की लागत से 60 बंकर बनाने की योजना को मंजूरी दी गई है।
सीमावर्ती इलाकों में नालों पर पुलों और पुलिया का निर्माण भी कराया जा रहा है ताकि सेना और बीएसएफ का मूवमेंट प्रभावित नहीं हो। जम्मू क्षेत्र के सीमावर्ती इलाकों में नदियों के हिस्से में लेजर निगरानी के 10 करोड़ के पायलट प्रोजेक्ट पर भी काम जारी है। गृह राज्य मंत्री ने कहा कि इस साल अप्रैल तक में जम्मू कश्मीर में 55 आतंकी घटनाएं हुईं हैं। इससे पहले 2015 में 208, 2014 में 222 और 2013 में 170 आतंकी घटनाएं हुई थीं। इस सवा तीन साल के दौरान आतंकी घटनाओं में 146 जवान शहीद हुए और 41 नागरिकों को भी जान गंवानी पड़ी।