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SC: सुप्रीम कोर्ट में सेना ने जताई असम में बांग्लादेश सीमा के पास अस्पताल निर्माण पर आपत्ति, जानें पूरा विवाद

Wed, 14 Jan 2026 08:23 PM IST
लव गौर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारतीय सेना ने असम में भारत-बांग्लादेश सीमा के पास एकमल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल के निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट में आपत्ति जताई है। ऐसे में जानिए क्या है यह विवाद और सेना इस अस्पताल को लेकर क्यों आपत्ति जा रही है।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
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विस्तार
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असम के जोरहाट में संवेदनशील भारत-बांग्लादेश सीमा के पास एक सैन्य शिविर के सामने प्रस्तावित मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल के निर्माण का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में गरमा गया है। सेना ने ड्रोन की आवाजाही और लंबी दूरी की स्नाइपर राइफलों के इस्तेमाल की आशंका जताते हुए इसके निर्माण पर आपत्ति जताई है।
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सेना ने पहले जोरहाट विकास प्राधिकरण की ओर से निजी कंपनी को अस्पताल निर्माण के लिए दिए गए अनापत्ति प्रमाण पत्र पर आपत्ति जताई थी। अब उसने कहा है कि अगर अस्पताल के निर्माण की अनुमति दी भी जाती है, तो उसकी चाहरदीवारी 15 फुट से अधिक ऊंची होनी चाहिए और उसमें विभाजक लगे होने चाहिए। साथ ही बहुमंजिला इमारत की कोई भी खिड़की सेना शिविर की ओर नहीं होनी चाहिए।

संतुलन बनाना आवश्यक: कोर्ट
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने 8 जनवरी को सेना के अधिकारियों और केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) विक्रमजीत बनर्जी की दलीलें सुनीं। पीठ ने कहा कि एक तरफ जन स्वास्थ्य है तो दूसरी तरफ राष्ट्रीय सुरक्षा संतुलन बनाना आवश्यक है। पीठ ने एएसजी और अस्पताल का निर्माण कर रही निजी कंपनी डॉ. एन सहेवाला एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के वकील सिद्धार्थ दवे को दो सप्ताह के भीतर समाधान निकालने को कहा है।
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'अस्पताल के निर्माण के खिलाफ नहीं, लेकिन...' 
सेना ने कहा कि वह अस्पताल के निर्माण के खिलाफ नहीं है, क्योंकि आपात स्थिति में यह उसके कर्मियों के लिए भी फायदेमंद हो सकता है, लेकिन कुछ सुरक्षा उपाय होने चाहिए। भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थिति इस समय बेहद अस्थिर है। खतरा केवल लंबी दूरी की स्नाइपर राइफलों का ही नहीं है, बल्कि आजकल शिविर पर नजर रखने के बाद ड्रोन भी लाया जा सकता है। अदालत ने सेना के एक कर्नल की दलीलें दर्ज करने के बाद कहा कि दोनों पक्ष समाधान निकाल सकते हैं, क्योंकि जन स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों ही महत्वपूर्ण हैं।

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इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 8 जनवरी के अपने आदेश में कहा था कि हमने एएसजी विक्रमजीत बनर्जी और वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे से कर्नल सौरभ के साथ बैठक करने और जन स्वास्थ्य के अन्य महत्वपूर्ण पहलू को नजरअंदाज किए बिना राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने के तरीकों और साधनों पर विचार करने का अनुरोध किया है। हम उम्मीद करते हैं कि संबंधित पक्ष मुद्दों के सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण समाधान तक पहुंचने वाली बैठक का विवरण हमारे समक्ष प्रस्तुत करेंगे।

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