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सेना पूरी तरह तैयार, चीन दोबारा नहीं करेगा घुसपैठ की हिमाकत 

Tue, 16 Jan 2018 02:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता
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indian army - फोटो : BASIT ZARGAR
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सेना की पूर्वी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (जीओसी-इन-सी) लेफ्टिनेंट जनरल अभय कृष्ण ने सोमवार को यहां कहा कि भारतीय सेना हर मोर्चे पर पूरी तरह तैयार है और अब आगे उससे किसी गलत हरकत की आशंका नहीं है। वे अरुणाचल प्रदेश के तूतिंग में चीन की सड़क बनाने वाली टीम के भारतीय क्षेत्र में घुसने की हालिया घटना का जिक्र कर रहे थे। कृष्णा ने कहा कि वहां सेना मौजूद है और चीनी टीम को वहां अपने उपकरणों व मशीनों को छोड़कर वापस जाना पड़ा था।
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यहां सेना दिवस के मौके पर पत्रकारों से बातचीत में लेफ्टिनेंट जनरल कृष्णा ने कहा कि हम हर मोर्चे पर पूरी तरह तैयार हैं। तूतिंग में सेना की मौजूदगी की वजह से ही चीनी टीम को वहां अपनी मशीनें छोड़कर भागना पड़ा था। उन्होंने कहा कि अब नहीं लगता कि चीन आगे से ऐसी कोई हरकत करेगा। उनसे पूछा गया था कि दोकलम विवाद को ध्यान में रखते हुए भारतीय सेना कितनी तैयार है। एक अन्य सवाल के जवाब में कृष्णा ने कहा कि भारत ने चीन को उनकी मशीनें व दूसरे उपकरण कुछ दिन पहले लौटा दिए हैं।

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जनरल अभय कृष्ण
जीओसी ने कहा कि भारत एक परिपक्व राष्ट्र है। इसलिए हमने उनके सामान लौटा दिए। घटना के कुछ दिनों बाद उन लोगों ने वापस आकर बातचीत की। उसके बाद सामान लौटा दिया गया। भारतीय सेना ने उनको दो-टूक लहजे में बता दिया कि वे भारतीय क्षेत्र में नहीं घुस सकते। ले.जनरल ने कहा कि चीनी टीम ने अपनी गलती समझने के बाद माफी मांग ली। इसे स्थानीय लोगों (चीनी सेना के) की गलती मानते हुए उन्होंने आगे से ऐसी गलती नहीं दोहराने का भरोसा भी दिया। उन्होंने कहा कि सेना किसी भी हालात से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और देश की अखंडता की रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास करेगी।

कृष्णा ने बताया कि दोकलम में 28 अगस्त के बाद से ही यथास्थिति बहाल है।  उन्होंने बताया कि सेना चीन से अरुणाचल प्रदेश होकर असम पहुंचने वाली ब्रह्मपुत्र नदी पर आधारभूत ढांचा विकसित कर रही है। किसी आपात स्थिति में सेना की टुकड्यिों को तेजी से मौके पर पहुंचना होगा। पूरी फौज हमेशा सीमा पर नहीं रह सकती। सेना की टुकड़ियां पूरे देश में बिखरी हैं। ऐसे में हमें कम से कम समय में मौके पर पहुंचने के लिए हरसंभव संसाधन जरूरी है।

एक सवाल के जवाब में सैन्य कमांडर ने कहा कि पूर्वोत्तर इलाका दुर्गम होने के बावजूद कोई भी इलाका सेना की पहुंच से बाहर नहीं है। तमाम इलाकों में पहुंचने के लिए सड़कें नहीं हैं। बावजूद इसके उन इलाकों की नियमित रूप से निगरानी की जाती है।
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