एक ओर भारत मंगलवार को कारगिल का 17वां विजय दिवस मना रहा है, वहीं भारतीय रक्षा मंत्रालय कारगिल में हुए तीन महीने के संघर्ष का इतिहास लिख रहा है।
दो साल का ये लंबा प्रोजेक्ट पिछले साल जनवरी में शुरु हुआ था, जिसकी अगुवाई इतिहासकार श्रीनाथ राघवन कर रहे हैं।
पाकिस्तानी घुसपैठियों को कारगिल से खदेड़ने वाली भारतीय सेना ने रक्षा मंत्रालय की इतिहास शाखा से किसी भी प्रकार की रणनीतिक जानकारी साझा करने से मना कर दिया है।
ये अहम जानकारी नहीं साझा करना चाहती सेना
कारगिल
हालांकि सेना मुख्यालय ने रक्षा मंत्रालय की इतिहास शाखा को एक्शन रिपोर्ट के छह वॉल्यूम दे दिए हैं जो कि सैन्य संचालन महानिदेशालय और उत्तरी कमान द्वारा तैयार किए गए थे।
इसके अलावा सेना ने किसी और तरह की फाइल देने से मना कर दिया है। जिसमें युद्ध में भाग लेने वाली सेना की सभी कमान की युद्ध डायरी शामिल हैं।
साथ ही डीजीएमओ (डाइरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन) ने तत्तकालीन खुद की युद्ध डायरी भी साझा करने से मना कर दिया है।
ये भी जानकारी अभी नहीं दी जा सकती
अंगेज्री अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक सेना के पूर्व अधिकारी विनोद भाटिया बताते हैं कि ये जरूरी है कि कारगिल का इतिहास लिखा जाना चाहिए, लेकिन हर तरह की रणनीतिक जानकारी साझा नहीं की जा सकती।
क्योंकि वर्तमान में हमारी कुछ तैनाती कारगिल के युद्ध की स्थितियों पर आधारित हैं । ऐसे में डीजीएमओ इस तरह की कोई जानकारी नहीं दे सकता।
इसके अलावा युद्ध में रणनीतिक तौर पर हम किस तरह से काम करते हैं ये भी जानकारी अभी नहीं दी जा सकती। भाटिया कहते हैं कि हमारे यहां के भंडार, सेना तक रसद की पहुंच ये सारी बातें पब्लिक डोमेन की नहीं हैं।
20 संघर्षों की कहानी लिख चुका है विभाग
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सूत्र बताते हैं कि वायु सेना और नौ सेना मुख्यालय ने कहा कि वो कारगिल के युद्ध से संबंधित जानकारी इतिहास विभाग को मुहैया कराने के लिए तैयार हैं। अखबार के मुताबिक वरिष्ठ सेना के अधिकारी कहते हैं कि कारगिल का इतिहास इस वक्त लिखना जल्दबाजी होगी।
अगर प्रोजेक्ट के शुरु होने से पहले रक्षा मंत्रालय हमें इस बात की जानकारी देता तो हम इस प्रोजेक्ट को पांच से सात साल बाद करने के लिए कहते।
आपको बता दें कि 1953 में रक्षा मंत्रालय की इतिहास शाखा बनाई गई जिसने अब तक 20 संघर्षों की कहानी लिखी है। जिनमें 1948 कश्मीर संघर्ष, 1965 इंडो चाइना वॉर, 1971 बांग्लादेश वॉर, 1962 भारत-चीन युद्ध, सियाचीन युद्ध, भारत-श्रीलंका ऑपरेशन शामिल हैं।