सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे का कहना है कि देश के सामने मौजूद रणनीतिक अनिश्चितताओं और महामारी जैसे गैर-परंपरागत खतरों से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए अब वक्त आ गया है कि भारत सरकार का पूरा तंत्र साथ मिलकर काम करे सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने कहा कि एकीकृत संघर्ष समूहों (आईबीजी) का व्यापक परीक्षण पूरा कर लिया गया है, लेकिन कोरोना वायरस महामारी के कारण इनकी तैनात में देरी हुई है।
भारत के पड़ोस में विद्यमान जटिल भौगोलिक-राजनीतिक सत्ता के संदर्भ में जनरल नरवणे ने कहा कि भारतीय सेना क्षेत्र को पूर्ण सुरक्षा मुहैया कराने वाले देश के रूप में भारत की छवि को पुख्ता करना चाहती है। सेना प्रमुख ने कहा कि रणनीतिक अनिश्चितताओं का पूरा का पूरा पुलिंदा हमारे सामने मौजूद हैं और समय की मांग है कि उन्हें दूर करने के लिए भारत सरकार का पूरा तंत्र साथ आए।
जनरल नरवणे ने हालांकि, इस पर विस्तार से कुछ नहीं कहा, लेकिन उनकी टिप्पणी ऐसे समय आई है जब पाकिस्तान समर्थित तालिबान अफगानिस्तान की सत्ता में अपनी भूमिका तय करने और चीन लगातार श्रीलंका, नेपाल, म्यामांर और मालदीव जैसे देशों के साथ सैन्य संबंधों का विस्तार करने की कोशिश में जुटा हुआ है। ऐसा माना जा रहा है कि युद्ध से जर्जर देश से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के संबंध में तालिबान के साथ अमेरिका के ऐतिहासिक समझौते के बाद अफगानिस्तान की नाजुक स्थिति को लेकर भारत चिंतित है।
सेना प्रमुख ने कहा कि भारत को राष्ट्रीय सुरक्षा के अपने दृष्टिकोण को और विस्तार देना होगा और उसे गैर-परंपरागत खतरों जैसे महामारी आदि पर भी नजर रखनी होगी क्योंकि उनमें देश को गंभीर नुकसान पहुंचाने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि हमें इसी आधार पर स्वयं को तैयार करना और काम करना होगा। उन्होंने कहा कि भारत के समक्ष उपस्थित परंपरागत खतरे ज्यों के त्यों बने हुए हैंऔर सेना उनसे निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
सेना ने विशेष रूप से चीन और पाकिस्तान से लगी सीमाओं पर अपनी युद्धक क्षमता में आमूल-चूल सुधार के तहत पैदल सेना, तोपों, हवाई रक्षा उपकरणों, टैंकों एवं साजो-सामान इकाइयों को मिलाकर आईबीजी तैयार करने की योजना बनाई थी।
सेना प्रमुख ने कहा कि महामारी फैलने के कारण और महत्वपूर्ण संसाधनों को रोकथाम के प्रयासों में लगाए जाने की वजह से आईबीजी का परिचालन शुरू होने में देरी हुई है। उन्होंने कहा कि हालांकि, मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि हम उचित समय-सीमा के भीतर आईबीजी की तैनाती करना शुरू कर देंगे क्योंकि अवधारणा के स्तर पर जमीनी कार्य हो चुका है तथा महामारी का प्रकोप शुरू होने से पहले ही गहन परीक्षण भी हो चुका है।
सेना प्रमुख ने यह भी कहा कि कोविड-19 की वजह से रक्षा उत्पादन और अधिग्रहण की प्रक्रियाओं में कुछ अवरोध उत्पन्न हो सकते हैं, लेकिन यह अस्थाई दौर होगा। सेना ने कई साल तक विचार-मंथन के बाद चीन और पाकिस्तान से लगी सीमाओं पर आईबीजी तैनात करने का फैसला किया था।
जिससे युद्ध की स्थिति में त्वरित हमले करने में मदद मिलेगी। प्रत्येक आईबीजी की कमान एक मेजर जनरल संभालेंगे और इसमें करीब 5,000 सैनिक होंगे। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की पिछले साल अक्तूबर में हुई भारत यात्रा से पहले भारतीय सेना ने अरुणाचल प्रदेश में ‘हिम विजय’ अभ्यास किया था, जिसमें मुख्य रूप से आईबीजी की पर्वतीय क्षेत्र में लड़ाकू क्षमता का परीक्षण किया गया था।
प्रत्येक आईबीजी क्षेत्र की भौगोलिक संरचना और वहां खतरे की आशंकाओं पर विचार करके विशेष अभियान संबंधी जरूरतों के आधार पर तैयार किया जाएगा। क्या महामारी के कारण सेना के सैन्य खरीद कार्यक्रम पर असर पड़ेगा, इसके जवाब में जनरल नरवणे ने कहा कि अल्पकालिक रूप से कुछ असर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि रक्षा उत्पादन और अधिग्रहण विस्तृत और दीर्घकालिक प्रक्रियाएं हैं जिनमें अनेक प्रणालियों, उप प्रणालियों का संयोजन होता है तथा ये वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर निर्भर करती हैं। महामारी की वजह से कुछ अवरोध हो सकते हैं, लेकिन मुझे यह अस्थाई दौर लगता है।