पुणे विश्वविद्यालय के परिसर में हुए दूसरी सामरिक वार्ता ‘चीन का उदय और दुनिया के लिए इसके निहितार्थ’ के उद्घाटन के बाद सोमवार को सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने कहा कि सऊदी अरब और ईरान के बीच शांति वार्ता की मध्यस्थता कर तथा यूक्रेन व रूस के बीच जारी जंग का समाधान करने के लिए 12 सूत्रीय शांति योजना को पेश कर चीन वैश्विक सुरक्षा प्रदाता के रूप में अमेरिका की जगह लेना चाहता है।
यूक्रेन-रूस जंग का उल्लेख करते हुए जनरल पांडे ने कहा कि इसने भू-राजनीतिक सुरक्षा पर गहराई से उभरने वाले कई पहलुओं के साथ परिदृश्य में अशांति को जोड़ा है। उन्होंने कहा कि समुद्री और क्षेत्रीय अनसुलझे सीमा विवाद, अवैध सीमापार प्रवासन, गैरकानूनी और अनियमित मछली पकड़ने जैसे गैर पारंपरिक खतरों और जलवायु परिवर्तन से प्रेरित आपदाओं के लिए क्षेत्रीय भेद्यता के साथ बढ़ते धार्मिक कट्टरवाद दक्षिण एशिया क्षेत्र को प्रभावित करने वाले हैं।
क्षेत्रीय व वैश्विक आकांक्षाओं से प्रेरित है चीन
जनरल मनोज पांडे ने कहा, अभिव्यक्तियों का निश्चित रूप से हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रभाव पड़ता है। इसी पृष्ठभूमि के बीच चीन का उदय जारी है। यह अपनी क्षेत्रीय और वैश्विक आकांक्षाओं से प्रेरित है। एक राजनीतिक, तकनीकी और सैन्य शक्ति के रूप में चीन के उदय ने इसे विश्व व्यवस्था में एक नई श्रेणीबद्ध स्थिति प्रदान की है जिसका वह नेतृत्व करना चाहता है।
चीन सीमा पर हालात बिगाड़ सकता है अतिक्रमण
वहीं, सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय में 'चीन का उभार और विश्व पर इसका परिणाम' विषय पर दूसरे रणनीतिक संवाद को संबोधित करते हुए सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने कहा कि चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर हालात बिगड़ने में अतिक्रमण संभावित कारक हो सकता है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए भारत की तैयारी पूरी है और उसने पर्याप्त बल तैनात कर रखा है। उन्होंने कहा कि चीन ने सैन्य बलों को ले जाने, उनके संचालन और सैन्य अभियानों को चलाने में उल्लेखनीय क्षमता वृद्धि की है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लंबे समय से चल रहे सीमा विवाद एशिया के दो विशाल पड़ोसियों के द्विपक्षीय संबंधों में तलाक का कारण नहीं बन सकता।
तीन बिंदुओं पर निर्भर करेगा भारत-चीन संबंध
विदेश मंत्री एस जयशंकर को उद्धृत करते हुए जनरल पांडे ने कहा, भारत चीन संबंधों को टिकाऊ और सकारात्मक राह पर बने रहने के लिए इसे तीन बिंदुओं पर आधारित होना चाहिए, संवेदशनशीलता, सम्मान और आपसी हित। सेना प्रमुख ने कहा कि सीमा पर अतिक्रमण के चीन के प्रयास दोनों देशों के बीच पिछले समझौतों और प्रोटोकॉल का उल्लंघन तथा भारत के लिए चिंता का कारण थे। लेकिन सेना की तैयारी उच्च स्तर की है। जनरल पांडे का यह बयान दोनों देशों के बीच पूर्वी लद्दाख में मई 2020 में हुई झड़प के संदर्भ में था।
किसी भी गड़बड़ी से हो सकता है बड़ा विवाद
जनरल पांडे ने कहा, मुझे लगता है कि सबसे महत्वपूर्ण पहलू आज भी गैर निर्धारित और विवादित सीमा को लेकर विरासत से जुड़ी हमारीचुनौतियां है। वास्तविक नियंत्रण रेखा के निर्धारण में अलग-अलग दावे और प्रतिदावे हैं। इसके कारण अतिक्रमण हालात बिगड़ने के संभावित कारक बना हुआ है। इसे देखते हुए चीन-भारत सीमा के प्रबंधन में करीबी निगरानी जरूरी है क्योंकि इसमें कोई भी गड़बड़ी बड़े विवाद को जन्म दे सकती है।