सीएपीएफ: 'केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल'
कर्तव्य पथ पर अपने प्राण न्यौछावर करने वाले केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के कर्मियों के निकटतम संबंधियों को दिए जाने वाले लाभ
- केंद्रीय अनुग्रह राशि: सीएपीएफ और असम राइफल के मृत कर्मियों के निकटतम संबंधियों को केंद्रीय अनुग्रह राशि के रूप में दी जाने वाली एकमुश्त क्षतिपूर्ति की राशि को एक जनवरी 2016 से बढ़ाकर सक्रिय ड्यूटी पर मृत्यु के लिए 15 लाख रुपये से 35 लाख रुपये और ड्यूटी पर दस लाख रुपये से 25 लाख रुपये कर दी गई है।
- असाधारण पेंशन: मृत कर्मियों के निकटतम संबंधी केंद्रीय सिविल सेवा (असाधारण पेंशन) नियमावली 1939 के तहत उदारीकृत पारिवारिक पेंशन (अर्थात अंतिम आहरित वेतन) प्राप्त करने के पात्र हैं।
- सेवा संबंधी लाभ: सभी सेवा संबंधी लाभ यथा मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति ग्रेच्युटी (डीसीआरजी), छुट्टी नकदीकरण, केंद्रीय सरकार कर्मचारी समूह बीमा योजना (सीजीईजीआईएस), सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) आदि स्वीकार्य हैं।
- बल स्तर की कल्याणकारी योजनाएं: प्रत्येक बल ने कर्मचारियों/जवानों के लिए बल स्तर की कल्याणकारी योजनाएं बनाई हैं। जैसे हितकारी निधि, शिक्षा के लिए बच्चों को वित्तीय सहायता/छात्रवृत्ति और पुत्री व बहन के विवाह की खातिर वित्तीय सहायता।
- भारत के वीर निधि: भारत के वीर एक ऑनलाइन पोर्टल है, जहां पर कोई भी व्यक्ति प्राण न्यौछावर करने वाले सीएपीएफ कर्मियों के निकटतम संबंधियों को स्वेच्छा से दान दे सकते हैं। यह अंशदान सीधे निकटतम संबंधियों के खाते में ऑनलाइन जमा कराया जाता है। इसके अतिरिक्त 'भारत के वीर' कॉर्पस में प्राप्त निधियों को भी ऐसे ही कर्मियों के निकटतम संबंधियों के बीच बांटा जाता है।
- ऑपरेशन कैजुअल्टी प्रमाण पत्र: कार्रवाई में अपने प्राणों की आहुति देने वाले सीएपीएफ कर्मियों को, सशस्त्र बलों को प्रदान किए जाने वाले 'बैटल कैजुअल्टी प्रमाण पत्र' की तर्ज पर 'ऑपरेशन कैजुअल्टी प्रमाण पत्र' मिलता है। सीएपीएफ कर्मियों के निकटतम संबंधी रक्षा कर्मियों के 'बैटल कैजुअल्टी प्रमाण पत्र' से नवाजे जाने पर उनके निकटतम संबंधियों को मिलने वाले लाभों की तर्ज पर कुछ लाभ यथा हवाई और रेल यात्रा भाड़े में छूट और तेल उत्पाद एजेंसियों के आबंटन आदि के पात्र हैं।
- प्रधानमंत्री छात्रवृत्ति योजना (पीएमएसएस): इसके तहत सेवारत/भूतपूर्व सीएपीएफ, असम राइफल्स और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के कर्मियों की बालिकाओं के लिए 2250 रुपये प्रतिमाह व बालकों के लिए 2000 रुपये प्रतिमाह की राशि जारी की जाती है। शैक्षणिक वर्ष 2019-20 से छात्रवृत्ति की राशि बढ़ाकर बालकों के लिए 2,500 रुपये व बालिकाओं की राशि 3000 हजार रुपये कर दी गई है।
- राज्यों/संघ राज्यों क्षेत्रों द्वारा अनुग्रह मुआवजे का प्रावधान: कई राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों ने भी निकटतम संबंधियों को अपने नियमों के अनुसार मुआवजा/सहायता प्रदान करने का प्रावधान किया गया है।
जवानों की शहादत में कोई भेदभाव न किया जाए: एसोसिएशन
कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने बीते दिनों जवानों की शहादत राशि को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। इसमें पीएम से अपील की गई है कि देश के लिए जान देने वाले शहीदों के सम्मान में जो राशि दी जा रही है, उसमें भेदभाव न किया जाए। शहीद जवानों के मामले में केंद्र और राज्य सरकारों की नीति में अंतर नहीं होना चाहिए। किसी राज्य में शहीद को पांच करोड़ रुपये मिल रहे हैं, तो दूसरे राज्य में वह राशि पांच या दस लाख रुपये पर सिमट जाती है।
एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह का कहना था कि जब शत्रु की गोली यह नहीं देखती कि सामने सीना किसका है, जवान किस बल या यूनिट का है तो फिर राज्यों को भी शहीदों के परिवार को दी जाने वाली शहादत राशि को लेकर कोई भेदभाव नहीं बरतना चाहिए। देश के अंदरूनी हिस्सों में कानून व्यवस्था को बनाए रखने एवं सरहदों की सुरक्षा के लिए हजारों की संख्या में जवानों ने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया है। इनमें सेना व अर्धसैनिक बलों के जवान शामिल हैं।
राज्यों की पुलिस ने भी अपना योगदान दिया है। कश्मीर में प्रॉक्सी वार हो या फिर नक्सल प्रभावित राज्यों में शहीद हुए जवान, ताड़मेटला-चिंतलनार जहां 76 सीआरपीएफ के जवानों ने अपनी शहादत दी या फिर पुलवामा के 40 शहीद। पिछले दिनों गलवां घाटी में सरहद पर सेना के बीस जवान शहीद हो गए। कश्मीर के हंदवाड़ा में शहीद हुए राष्ट्रीय राइफल्स के कर्नल आशुतोष के परिवार को उत्तर प्रदेश सरकार ने पचास लाख रुपये दिए।
दूसरी तरफ उसी एनकाउंटर में शहीद हुए नायक राजेश कुमार को पंजाब सरकार ने मात्र दस लाख रुपये दिए हैं। सेना एवं अर्धसैनिक बलों के शहीद परिवारों को दी जाने वाली राशि व दूसरी सुविधाओं को लेकर केंद्र एवं राज्य स्तर पर एक जैसी नीति बनाई जाए। राष्ट्रीय शहीद सुरक्षा कोष की स्थापना की जाए। केंद्र सरकार, इस बाबत राज्य सरकारों को दिशा निर्देश जारी करे।
केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में 2004 से पुरानी पेंशन व्यवस्था खत्म कर दी गई है। जवान, अपने जीवन के चालीस साल देश सेवा में लगाते हैं। लेकिन जब ये रिटायर होते हैं तो इन्हें पेंशन सुविधा तक नहीं मिलती। सरकार को कई बार लिखा गया है कि सीएपीएफ को सेना की तर्ज पर वन रैंक वन पेंशन दी जाए।