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केंद्रीय सुरक्षाबलों में आने को तैयार नहीं राज्यों की आर्म्ड पुलिस

Tue, 19 Nov 2019 05:20 PM IST
आसिम खान जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली 
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केंद्रीय सुरक्षाबल
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केंद्र सरकार की योजना 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' के तहत केंद्रीय सुरक्षा बल और विभिन्न राज्यों की आर्म्ड पुलिस एक दूसरे के यहां पर आने के लिए तैयार नहीं दिख रही हैं। केंद्रीय सुरक्षा बल, जैसे सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, सीआईएसएफ, एनएसजी और असम राइफल के जवान तो राज्यों की पुलिस में जाने के लिए तैयार हैं, लेकिन राज्यों की आर्म्ड पुलिस के जवान केंद्रीय सुरक्षा बलों में आने का मन नहीं बना पा रहे हैं। इसमें वेतन भत्ते के अलावा 'जोखिम' सबसे बड़े कारण के तौर पर सामने आ रहा है। 

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गृह मंत्रालय ने इस बाबत सभी बलों के प्रमुखों को रिमाइंडर भेजकर कहा है कि वे अविलंब 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' (एटीआर) प्रस्तुत करें। इन सब बातों के माद्देनजर केंद्र सरकार की 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' योजना को झटका लगने के आसार बनते नजर आ रहे हैं। गृह मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' योजना को लागू करने के लिए 24 अक्तूबर को कैबिनेट सचिवालय में एक बैठक आयोजित की गई थी। 

कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह तय हुआ था कि केंद्रीय सुरक्षा बलों और राज्यों की आर्म्ड पुलिस के बीच एक्सचेंज प्रोग्राम जल्द से जल्द शुरू किया जाए। इससे पहले 22 अक्तूबर को इस योजना बाबत केंद्रीय गृह सचिव की अध्यक्षता में भी एक बैठक हुई थी। इस बैठक में कहा गया कि 4 नवंबर तक सभी केंद्रीय बल अपनी-अपनी एटीआर जमा करा दें। पांच नवंबर तक जब किसी भी पक्ष ने एटीआर जमा नहीं कराई तो सभी को रिमांडर भेजा गया। 
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साथ ही इस रिमांडर में यह भी कहा गया कि इसे उच्च प्राथमिकता के तौर पर लिया जाए। सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय सुरक्षा बलों के अधिकारियों ने राज्यों की पुलिस में अपने समकक्ष अफसरों से इस बारे में बातचीत की है। उसमें किसी भी राज्य की आर्म्ड पुलिस ने केंद्रीय सुरक्षा बलों में आने के लिए उत्साह नहीं दिखाया। 

केंद्रीय सुरक्षा बलों में इसलिए नहीं आना चाह रही राज्यों की आर्म्ड पुलिस

एक अधिकारी के मुताबिक, राज्यों की आर्म्ड पुलिस अधिकांश समय खाली रहती है। चुनावी ड्यूटी, दंगा, रोड जाम या वीवीआईपी बंदोबस्त आदि में ही आर्म्ड पुलिस को लगाया जाता है। ये सब कुछ सालभर नहीं चलता, इसलिए आर्म्ड पुलिस अपने ट्रेनिंग सेंटर पर ही मौजूद रहती है। खास बात, राज्य पुलिस में केंद्रीय सुरक्षा बलों की भांति कोई बड़ा जोखिम नहीं होता। दूसरी ओर केंद्रीय सुरक्षा बल ज्यादातर, नक्सल, जम्मू कश्मीर और नॉर्थ ईस्ट जैसे अत्यंत जोखिम वाले इलाकों में तैनात रहते हैं। 

कुछ इलाकों तो ऐसे हैं, जहां कई वर्षों के बाद सुरक्षा बलों को स्थिति और जोखिम समझ आता है। ऐसे में राज्यों की आर्म्ड पुलिस यहां आने का जोखिम क्यों उठाएगी। यदि आर्म्ड पुलिस का कोई जवान हिम्मत कर केंद्रीय सुरक्षा बलों में आने का मन बनाता है तो वह इसके लिए कुछ फायदों की चाहत तो रखेगा ही। जैसे, आर्म्ड पुलिस का जवान चाहेगा कि उसे वेतन भत्ते बढ़े हुए मिलें और एक प्रमोशन भी दी जाए। 

केंद्रीय सुरक्षा बल के एक अधिकारी का कहना है कि वेतन भत्ते और प्रमोशन दे दिया जाए तो भी अधिकांश जवान केंद्र में नहीं आना चाहेंगे। दोनों बलों की ट्रेनिंग और ड्यूटी के तौर तरीकों में जमीन आसमान का अंतर है। नक्सल प्रभावित इलाके या कश्मीर घाटी, जहां पर केंद्रीय सुरक्षा बलों को हर पल जान हथेली पर रखकर ड्यूटी देनी पड़ती है, वहां राज्यों की आर्म्ड पुलिस खुद को इतनी जल्दी एडजस्ट नहीं कर सकेगी। इसके लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों को ही कई साल लग जाते हैं। 

दूसरा, आर्म्ड पुलिस के जवान अपने राज्य में हैं, अपने परिवार के साथ हैं, ऐसे में वे कोई बड़ा जोखिम उठाने से पहले सौ बार सोचेंगे। गृह मंत्रालय के अधिकारी का कहना है कि 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' योजना को लागू किया जाएगा। इसके लिए एटीआर तैयार हो रही है। राज्यों से बातचीत कर आर्म्ड पुलिस के जवानों को कुछ न कुछ प्रोत्साहन दिया जाएगा। उम्मीद है कि जल्द ही इस बाबत ठोस राह निकलेगी। 
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