सेना की जवाबदेही सरकार को बनती है, अगर ऐसा नहीं है तो देश में मार्शल लॉ यानी सेना का कानून माना जाएगा। ऐसा सुप्रीम कोर्ट का कहना है। दरअसल, पिछले कई दिनों से सरकार पर सेना की कार्यवाही का राजनीतिक फायदा उठाने आरोप लगता आ रहा है। तमाम विपक्षी दल केंद्र सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि 29 सिंतबर को पीओके में सेना ने जो सर्जिकल स्ट्राइक की, सरकार उसका गुणगान कर और पोस्टर छपवाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है।
रक्षा मंत्री मनोहर परिकर पर सबसे ज्यादा उंगलियां उठीं। परिकर ने पिछले दिनों एक कार्यक्रम में सर्जिकल स्ट्राइक के पीछे आरएसएस की शिक्षा को श्रेय दिया था। जिसके बाद से वह तमाम विपक्षी दलों के निशाने पर आ गए।
सर्जिकल स्ट्राइक के बाद यह सवाल उठने लगा कि सेना की जवाबदेही केंद्र सरकार को बनती है, या नहीं? एक याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें कहा गया कि सेना की जवाबदेही राष्ट्रपति को बनती है, सरकार सेना का राजनीतिक लाभ ले रही है। इस पर सर्वोच्च अदालत ने कहा कि सेना की जवाबदेही सरकार को बनती है, नहीं तो देश में मार्शल लॉ लग जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से विपक्षियों का मुंह होगा बंद?
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सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद से उन तमाम विपक्षी दलों को ठेस जरूर पहुंचेगी, जो सरकार पर सर्जिकल स्ट्राइक का सियासी फायदा उठाने की बात कहते आ रहे हैं।
वहीं, कोर्ट के इस फैसले से मोदी सरकार के आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होना लाजमी है। दरअसल, 2017 में यूपी में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में मोदी सरकार पर आरोप लग रहा है कि सरकार उपनी छवि के मुताबिक फिर से देश प्रेम, हिंदुत्व आदि के मुद्दों पर वोट बटोरना चाहती है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने तो सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर पीएम मोदी पर जवानों के खून की दलाली का आरोप तक लगा दिया था।
वहीं, पूरी दुनिया भारतीय सेना की कार्यवाही को उचित ठहरा रही है, जबकि पाकिस्तान सर्जिकल स्ट्राइक की बात मानने को ही तैयार नहीं हैं। हालांकि इस मुद्दे पर पाक पीएम नवाज और पाक सेनाध्यक्ष राहील शरीफ के बीच अनबन जरूर सामने आई।