महाराष्ट्र एनसीपी (एसपी) के अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने बुधवार को कहा कि सत्तारूढ़ एनसीपी में विलय का मुद्दा खत्म हो गया है। इसके साथ ही पार्टी प्रमुख शरद पवार और एनसीपी नेता सुनील तटकरे की बैठक से उपजे नए सिरे से उठे अटकलों के बीच उन्होंने भविष्य में किसी भी तरह की चर्चा से इनकार किया।
एनसीपी (एसपी) के अध्यक्ष ने क्या कहा?
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एनसीपी (एसपी) के प्रमुख पवार ने देश और महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिति पर चर्चा करने और पार्टी को पुनर्जीवित करने की रणनीति तैयार करने के लिए आयोजित महत्वपूर्ण पार्टी बैठक की अध्यक्षता की। शिंदे ने कहा कि पवार के नेतृत्व में पार्टी को एक मजबूत विपक्षी ताकत के रूप में खड़ा करने के लिए सांसदों, विधायकों, चुनाव लड़ने वाले नेताओं, पदाधिकारियों और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ चर्चा की गई।
विलय का कोई सवाल ही नहीं उठता
शिंदे ने आगे कहा, 'सत्ताधारी एनसीपी के साथ विलय का कोई सवाल ही नहीं उठता। विलय का मुद्दा अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। मैंने यह बात पहले भी कही थी और मैं इसे फिर से दोहरा रहा हूं - भविष्य में इस तरह की कोई चर्चा नहीं होगी।'
शरद पवार ने1999 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) बनाई। हालांकि उस पार्टी की 2023 में उस समय विभाजित हो गई जब अजीत पवार (अब दिवंगत) अपने वफादार विधायकों के साथ भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति सरकार में शामिल हो गए और उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। चुनाव आयोग ने इस विभाजित गुट को ही असली एनसीपी के रूप में मान्यता दी।
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नेताओं के जनता के बीच ना दिखाई देने की आलोचना की
शिंदे ने कहा कि पार्टी की बैठक के दौरान कई नेताओं, निर्वाचित प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए और जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया कुछ नेताओं के जनता के बीच या आंदोलनों के दौरान दिखाई न देने की आलोचना का जिक्र करते हुए शिंदे ने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने ऐसी चिंताओं पर ध्यान दिया है और संगठनात्मक कार्य और विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से शामिल कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देगा।
उन्होंने कहा कि पार्टी एमवीए के सहयोगी दलों - शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस के साथ मिलकर आंदोलनों के माध्यम से नीट परीक्षा विवाद, महंगाई, खाना पकाने की गैस की कीमतों में वृद्धि और ईंधन से संबंधित समस्याओं जैसे मुद्दों को आक्रामक रूप से उठाएगी।
इस बीच, एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार की बैठक में अनुपस्थिति ने संभावित कारण को लेकर अटकलों को जन्म दिया। रोहित ने कहा कि वह बैठक में शामिल नहीं हो सके क्योंकि वह किसानों के लिए पानी के मुद्दे को उठाने के लिए पुणे में सिंचाई भवन गए थे।