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अरावली मामला: 'अभी खनन पट्टा धारकों के पक्ष में कोई आदेश पारित नहीं करेंगे', सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

Fri, 15 May 2026 03:36 PM IST
निर्मल कांत पीटीआई, नई दिल्ली।

सार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अरावली क्षेत्र में खनन को लेकर मिल रही चिंताजनक रिपोर्ट के कारण वह अभी खनन पट्टा धारकों के पक्ष में कोई आदेश नहीं देगा। अदालत ने साफ किया कि यह मामला गंभीर पर्यावरणीय मुद्दों से जुड़ा है और इसे चरणबद्ध तरीके से नहीं सुना जाएगा।
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अरावली मामला - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि वह फिलहाल खनन पट्टा धारकों के पक्ष में कोई आदेश पारित नहीं करेगा। कोर्ट ने कहा कि उसे अरावली पहाड़ियों और पर्वत श्रृंखला में खनन को लेकर काफी चिंताजनक प्रतिक्रिया मिल रही है।
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शीर्ष कोर्ट ने कहा कि इस मामले में खास पर्यावरणीय मुद्दे जुड़े हैं। फरवरी में कोर्ट ने पर्यावरण मंत्रालय और अन्य संबंधित पक्षों से कहा था कि वे ऐसे विशेषज्ञों के नाम सुझाएं जो अरावली पहाड़ियों और पर्वत श्रृंखला की परिभाषा तय करने के लिए एक समिति में शामिल हो सकें।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि वह इस मामले की टुकड़ों में सुनवाई नहीं करेगी और जब तक पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो जाती, किसी भी गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी। पीठ ने यह बात तब कही, जब शुक्रवार को सूचीबद्ध मामले का जिक्र कोर्ट में किया गया। यह मामला एक स्वतः संज्ञान मामला है, जिसका शीर्षक- 'अरावली पहाड़ियों और पर्वत श्रृंखला की परिभाषा और संबंधित मुद्दों पर विचार' है। 
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जो प्रतिक्रिया मिल रही, चिंताजनक है: सुप्रीम कोर्ट
सीजेआई ने इस बात पर गौर किया कि वहां बहुत कुछ हो रहा है और जो प्रतिक्रिया मिल रही है, वह काफी चिंताजनक है। कोर्ट ने वकील से कहा कि यदि किसी खनन पट्टे को रद्द किया जाता है तो संबंधित पक्ष उसे चुनौती दे सकता है। पीठ ने यह भी कहा कि वह फिलहाल खनन पट्टा धारकों के पक्ष में कोई आदेश पारित नहीं करेगी, क्योंकि यह एक संवेदनशील मामला है।

ये भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट से कुलदीप सिंह सेंगर को करारा झटका, अदालत ने दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश किया रद्द

20 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों और पर्वत श्रृंखला की एक समान परिभाषा को स्वीकार किया था। इसके साथ कोर्ट ने दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में इसके क्षेत्रों के भीतर नए खनन पट्टों पर तब तक रोक लगा दी थी, जब तक विशेषज्ञों की रिपोर्ट नहीं आ जाती।

पर्यावरण मंत्रालय की सिफारिशों को किया स्वीकार
कोर्ट ने पर्यावरण मंत्रालय की समिति की सिफारिशों को स्वीकार किया था, जिसमें अरावली पहाड़ियों की परिभाषा और दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला को बचाने की बात कही गई थी। समिति ने सुझाव दिया था कि अरावली पहाड़ी वह भू-आकृति होगी जो निर्धारित जिलों में स्थानीय स्तर से 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई पर हो और अरावली रेंज दो या अधिक ऐसी पहाड़ियों का समूह होगा जो एक-दूसरे से 500 मीटर के भीतर हों।
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29 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने इस नई परिभाषा को लेकर उठे विवादों पर ध्यान दिया और 20 नवंबर के आदेश को स्थगित कर दिया था व सभी खनन गतिविधियों पर रोक लगा दी थी। 
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