शीर्ष अदालत दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें से एक में कॉलेजियम द्वारा अनुशंसित नामों को मंजूरी देने में केंद्र द्वारा देरी का आरोप लगाया गया था। इन्ही पर सुनवाई करते हुए शीर्ष विधि अधिकारी की ओर से वकील द्वारा थोड़ा समय मांगे जाने पर न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और अरविंद कुमार की पीठ ने कहा कि 'कृपया यह सुनिश्चित करें कि जो अपेक्षित है, वह पूरा हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा की गई सिफारिशों के आधार पर ही न्यायाधीशों की नियुक्ति और उनके तबादले से जुड़े मुद्दों को पूरा किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र से इसे सुनिश्चित करने के लिए कहा है। इस दौरान न्यायमूर्ति एस के कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि 'कृपया यह सुनिश्चित करें कि जो अपेक्षित है, वह पूरा हो गया है।
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शीर्ष अदालत दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें से एक में कॉलेजियम द्वारा अनुशंसित नामों को मंजूरी देने में केंद्र द्वारा देरी का आरोप लगाया गया था। इन्ही पर सुनवाई करते हुए शीर्ष विधि अधिकारी की ओर से वकील द्वारा थोड़ा समय मांगे जाने पर न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और अरविंद कुमार की पीठ ने कहा कि 'कृपया यह सुनिश्चित करें कि जो अपेक्षित है, वह पूरा हो गया है। साथ ही अटार्नी जनरल से संपर्क करके जानकारी देने के लिए भी कहा। साथ ही अटार्नी जनरल आर वेंकटरमणी के उपलब्ध नहीं होने पर शीर्ष अदालत ने दोनों याचिकाओं पर सुनवाई 2 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी।
एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने पीठ से कहा कि कुछ नियुक्तियां चुनिंदा तरीके से अधिसूचित की जा रही हैं, जबकि कुछ को लंबित रखा जा रहा है। इस पर न्यायमूर्ति कौल ने कहा कि मैं यह मुद्दा पहले ही उठा चुका हूं। मैं कुछ मुद्दों को लेकर चिंतित भी हूं।' गौरतलब है कि इस पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार भी शामिल हैं।
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इस पर प्रशांत भूषण ने कहा कि 'कभी ना कभी, शीर्ष न्यायालय को ऐसा कहने के लिए अपनी शक्ति का उपयोग करना होगा, अन्यथा यह हमेशा चलता रहेगा।
इस दौरान याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने पीठ को बताया कि उन्होंने चार श्रेणियों में विवरण वाला एक चार्ट दायर किया है। इसमें पहला उच्च न्यायालयों में मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति के बारे में है और कुछ मामलों में नियुक्ति को अधिसूचित किया गया है जबकि अन्य में यह लंबित है।
इससे पहले तीन फरवरी को मामले की सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के तबादले की सिफारिशों को मंजूरी देने में देरी पर नाराजगी जताई थी। पीठ ने कहा था ति यह बेहद गंभीर मुद्दा है। तब अटॉर्नी जनरल ने पीठ को आश्वासन दिया था कि शीर्ष अदालत में पांच न्यायाधीशों की पदोन्नति के लिए पिछले साल दिसंबर की कॉलेजियम की सिफारिश को जल्द ही मंजूरी दे दी जाएगी।